सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को अब ड्यूटी के बाद और छुट्टी के दिन भी मोबाइल फोन पर उपलब्ध रहना पड़ेगा। सरकारी आदेश के अनुसार, घर जाकर या छुट्टी पर फोन को बंद नहीं कर सकते।
सरकारी काम करवाने के लिए आम लोगों अधिकारियों और कर्मचारियों के कई चक्कर लगाने पड़ते है। कई बार ड्यूटी के बाद और छुट्टी के दिन अधिकारी मोबाइल बंद कर लेते है या फ्लाइट मोड में डाल देते है। ऐसे में जनता को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई बार तो उनके जरूरी काम भी अटक जाते है, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। सरकार सरकार ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए एक नया आदेश जारी किया है। आदेशानुसार, सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से कहा कि वे कार्यालय समय के बाद, सप्ताहांत और छुट्टियों पर अपने मोबाइल फोन बंद न करें और कार्यालय समय के बाद भी काम के लिए उपलब्ध रहें।
विशेष सचिव (कार्मिक) द्वारा हस्ताक्षरित आदेश में पंजाब सरकार ने कहा कि यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी फोन पर उपलब्ध नहीं है, तो यह आवश्यक प्रशासनिक कार्य पूरा करने और आम जनता को सेवाएं और सुविधाएं प्रदान करने में बाधा बनता है। अब अधिकारी और कर्मचारी 24×7 मोबाइल फोन पर उपलब्ध रहेंगे।
यह बात संज्ञान में आई है कि कई अधिकारी कार्यालय समय के बाद अपने मोबाइल फोन पर उपलब्ध नहीं होते हैं। उनके फोन या तो स्विच ऑफ होते हैं, फ्लाइट मोड में होते हैं, कवरेज क्षेत्र से बाहर होते हैं या फिर कॉल डायवर्जन पर होते हैं। आदेश में कहा गया है कि प्रशासन से जुड़े कुछ कामों के लिए सरकार की तत्काल मंजूरी की जरूरत होती है। इसलिए इन कामों से जुड़े अधिकारियों की उपलब्धता जरूरी हो जाती है।
आदेश में कहा गया है कि सभी विशेष मुख्य सचिवों, अतिरिक्त मुख्य सचिवों, वित्त आयुक्तों, प्रधान सचिवों और सचिवों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया जाता है कि आपके विभाग के सभी अधिकारी कार्यालय समय के बाद और छुट्टियों के दिन आवश्यक कार्यालय प्रशासनिक कार्य पूरा करने के लिए मोबाइल फोन पर उपलब्ध रहें ताकि ये कार्य समय पर पूरे किए जा सकें।
इसी तरह का आदेश पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने 2017 में अपने कार्यकाल के पहले वर्ष में पारित किया था। उस समय सरकार ने कहा था कि कर्मचारियों के फोन बिल का भुगतान या प्रतिपूर्ति की जाती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे 24 घंटे उपलब्ध रहें। कर्मचारियों का फोन बिल हमेशा से सरकार और उनके बीच विवाद का विषय रहा है।
पिछली अकाली- भाजपा सरकार ने 2012 में सरकारी कर्मचारियों के लिए फोन भत्ता शुरू किया था, जबकि अमरिंदर सिंह सरकार ने 2020 में अपने कर्मचारियों के सेलफोन भत्ते को आधा करके खर्च को तर्कसंगत बनाने की योजना बनाई थी। इस कदम से सरकार को सालाना करीब 40 करोड़ रुपये की बचत होने की उम्मीद थी।
राज्य सरकार कर्मचारियों के मोबाइल भत्ते पर सालाना 101.2 करोड़ रुपये खर्च कर रही थी। इसके बाद भत्ते को आधा कर दिया गया और ग्रुप ए के कर्मचारियों का सेलफोन भत्ता 500 रुपये से घटाकर 250 रुपये प्रति माह कर दिया गया। ग्रुप बी के कर्मचारियों के लिए यह 300 रुपये से घटाकर 175 रुपये प्रति माह कर दिया गया। इसी तरह ग्रुप सी और डी के कर्मचारियों के लिए यह 250 रुपये से घटाकर 150 रुपये प्रति माह कर दिया गया।