
NIA - File PIC
Pahalgam Attack NIA Chargesheet: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले की जांच में बड़ा खुलासा किया है। सोमवार को जम्मू की विशेष NIA अदालत में दाखिल की गई 1,597 पृष्ठों की चार्जशीट में पाकिस्तानी आतंकवादियों की संलिप्तता को पुख्ता सबूतों के साथ उजागर किया गया है। जांच में निर्णायक भूमिका निभाने वाले दो एंड्रॉइड फोन, जो जुलाई में श्रीनगर के दाचीगाम जंगल में मुठभेड़ स्थल से बरामद हुए थे, पाकिस्तान में खरीदे गए पाए गए हैं।
यह हमला 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम के बैसारन घाटी में हुआ था, जिसमें 25 पर्यटक और एक स्थानीय नागरिक सहित कुल 26 लोग मारे गए थे। हमला धर्म के आधार पर लक्षित हत्याओं का मामला था, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था।
चार्जशीट में नामित मुख्य आरोपी पाकिस्तानी हैंडलर साजिद जट्ट हैं, जो लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का शीर्ष कमांडर और द रेसिस्टेंस फ्रंट (TRF) का प्रमुख है। इसके अलावा तीन पाकिस्तानी आतंकवादी सुलेमान उर्फ फैसल जट्ट, हमजा अफगानी और जिब्रान को भी आरोपी बनाया गया है, जिन्हें जुलाई 2025 में दाचीगाम मुठभेड़ के दौरान 'ऑपरेशन महादेव' में मार गिराया गया था। प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और उसकी प्रॉक्सी द रेसिस्टेंस फ्रंट (TRF) को हमले की योजना बनाने, सुविधा प्रदान करने तथा उसे अंजाम देने के लिए आरोपी ठहराया गया है। वहीं, दो स्थानीय सहयोगी परवेज अहमद जोठार और बशीर अहमद जोठार (पहलगाम निवासी) को भी चार्जशीट में शामिल किया गया है, जिन्हें 22 जून 2025 को आतंकवादियों को पनाह देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था और दोनों वर्तमान में न्यायिक हिरासत में हैं।
NIA के अनुसार, चार्जशीट में पाकिस्तान की साजिश, आरोपियों की भूमिका और वैज्ञानिक सबूतों का विस्तार से वर्णन है। जांच में बरामद फोनों से आतंकवादियों की पाकिस्तानी मूल की पुष्टि हुई है। इसके अलावा, एन्क्रिप्टेड संचार, हथियारों की फोरेंसिक जांच और गवाहों के बयान भी सबूतों का हिस्सा हैं। गृह मंत्री अमित शाह ने जुलाई में लोकसभा में घोषणा की थी कि दाचीगाम में मारे गए तीन आतंकवादी ही पहलगाम हमले के लिए जिम्मेदार थे और वे सभी पाकिस्तान से आए थे।
NIA ने इस मामले में भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने की धाराएं भी लगाई हैं। जांच एजेंसी ने कहा कि पाकिस्तान लगातार भारत के खिलाफ आतंकवाद प्रायोजित कर रहा है। यह चार्जशीट हमले के लगभग आठ महीने बाद दाखिल की गई है और पाकिस्तानी सरपरस्ती को कानूनी रूप से उजागर करने में महत्वपूर्ण कदम है। मामले की आगे की सुनवाई विशेष अदालत में होगी।
Updated on:
16 Dec 2025 10:59 am
Published on:
16 Dec 2025 10:59 am
