
चीन के बाद भारत दुनिया में सोने का सबसे बड़ा उपभोक्ता है। (Photo - ANI)
Gold import India: भारत में सोना सिर्फ निवेश या गहनों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोगों की बचत और सामाजिक परंपराओं का बड़ा हिस्सा बन चुका है। हालांकि अब रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ते गोल्ड इंपोर्ट (सोने का आयात) ने सरकार और अर्थशास्त्रियों की चिंता बढ़ा दी है। हालात ऐसे हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी लोगों से सोना खरीदने में सावधानी बरतने की अपील की है। वजह यह है कि सोने का बढ़ता आयात सीधे देश के विदेशी मुद्रा भंडार, रुपए की कीमत और व्यापार घाटे पर असर डाल रहा है।
हालांकि यह पहली बार नहीं है जब इस तरह की अपील की गई है। यूपीए सरकार में जब पी चिदंबरम वित्तमंत्री थे, तब उन्होंने 14 जून 2013 को देशवासियों से सोना नहीं खरीदने की अपील की थी। उस वक्त उन्होंने लोगों से 6 महीने से 1 साल तक सोना नहीं खरीदने की अपील की थी। वहीं, 1968 में इंदिरा गांधी सरकार (वित्त मंत्री मोरारजी देसाई) ने Gold Control Act 1968 लागू किया था।
भारत का गोल्ड इंपोर्ट वित्त वर्ष 2025-26 में 24 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 71.98 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। चीन के बाद भारत दुनिया में सोने का सबसे बड़ा उपभोक्ता है। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर सोना विदेशों से खरीदता है, इसलिए जितना ज्यादा सोना आयात होगा, उतने ज्यादा डॉलर देश से बाहर जाएंगे। यही कारण है कि सरकार इसे गैर-जरूरी आयात मानकर कम करने की कोशिश कर रही है।
| वित्त वर्ष | सोने का आयात (अरब डॉलर में) |
|---|---|
| 2025-26 | 71.98 |
| 2024-25 | 58.00 |
| 2023-24 | 45.54 |
| 2022-23 | 35.00 |
| 2021-22 | 46.14 |
| 2020-21 | 34.62 |
| 2019-20 | 28.20 |
सोने के आयात का सबसे बड़ा असर डॉलर की मांग पर पड़ता है। भारत जब विदेशों से सोना खरीदता है तो भुगतान डॉलर में करना पड़ता है। इससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ता है और रुपया कमजोर हो सकता है। हाल के महीनों में रुपए पर दबाव बढ़ने और व्यापार घाटा बढ़ने के बाद सरकार ने सोना और चांदी पर आयात शुल्क 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया है। सरकार का मानना है कि इससे गोल्ड इंपोर्ट कम होगा और रुपए को सहारा मिलेगा।
भारत पहले से ही कच्चे तेल का बड़ा आयातक है। अब तेल के साथ-साथ सोने का आयात भी तेजी से बढ़ रहा है। रायटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल 2026 में भारत का व्यापार घाटा बढ़कर 28.38 अरब डॉलर तक पहुंच गया। इसमें गोल्ड इंपोर्ट में 84 प्रतिशत की बढ़ोतरी भी बड़ी वजह रही। बढ़ता व्यापार घाटा अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का संकेत माना जाता है क्योंकि इससे देश से ज्यादा डॉलर बाहर जाते हैं।
सरकार ने सिर्फ आयात शुल्क नहीं बढ़ाया, बल्कि ड्यूटी-फ्री गोल्ड इंपोर्ट पर भी नई पाबंदियां लगाई हैं। अब एडवांस ऑथराइजेशन स्कीम के तहत 100 किलो से ज्यादा सोना आयात नहीं किया जा सकेगा। सरकार का उद्देश्य गोल्ड इंपोर्ट को नियंत्रित करना और विदेशी मुद्रा भंडार को बचाना है। हालांकि उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि ज्यादा टैक्स से तस्करी बढ़ सकती है और ज्वेलरी कारोबार प्रभावित हो सकता है।
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि जब बड़ी मात्रा में पैसा सोने में निवेश होता है तो वह उद्योग, कारोबार और उत्पादन जैसे क्षेत्रों में नहीं पहुंच पाता। यही वजह है कि सरकार चाहती है कि लोग संतुलित निवेश करें। फिलहाल पश्चिम एशिया संकट, महंगे तेल और बढ़ते सोने के आयात ने भारत की आर्थिक चिंता को और बढ़ा दिया है।
वाणिज्य मंत्रालय की मानें तो देश में सोने के आयात में बढ़ोतरी की मुख्य वजह इसकी कीमतों मे उछाला है, जोकि 76,617.48 डॉलर प्रति किलोग्राम (वित्त वर्ष 25) से बढ़कर 99,825.38 डॉलर प्रति किलोग्राम (वित्त वर्ष 26) हो गया है। दिल्ली में सोने की कीमतें 10 ग्राम के लिए लगभग 1.6 लाख रुपए के आसपास बनी हुई हैं। पिछले साल अप्रैल में, यह पहली बार 1 लाख रुपए के पार चली गई थी।
Updated on:
16 May 2026 09:05 am
Published on:
16 May 2026 09:05 am
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