Nirmal Singh Bhangoo: पर्ल्स ग्रुप के संस्थापक निर्मल सिंह भंगू का बीमारी के कारण दिल्ली के एक अस्पताल में निधन हो गया है। कई रिपोर्ट्स में यह जानकारी दी गई। बता दें, भंगू को सीबीआई द्वारा 45,000 करोड़ रुपये के पोंजी घोटाले में गिरफ्तार किया गया था। इससे करीब 5 करोड़ निवेश प्रभावित हुए थे। […]
Nirmal Singh Bhangoo: पर्ल्स ग्रुप के संस्थापक निर्मल सिंह भंगू का बीमारी के कारण दिल्ली के एक अस्पताल में निधन हो गया है। कई रिपोर्ट्स में यह जानकारी दी गई। बता दें, भंगू को सीबीआई द्वारा 45,000 करोड़ रुपये के पोंजी घोटाले में गिरफ्तार किया गया था। इससे करीब 5 करोड़ निवेश प्रभावित हुए थे। तिहाड़ जेल में भंगू का स्वास्थ्य खराब होने के बाद उन्हें पश्चिमी दिल्ली के दीन दयाल उपाध्याय हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। हालांकि, अभी जेल प्रशासन और सीबीआई की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
आकर्षक जमीन सौदों के माध्यम से पांच करोड़ निवेशकों से 45,000 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी के आरोप में भंगू समेत तीन अन्य लोगों को सीबीआई ने जनवरी 2016 में गिरफ्तार किया। पिछले साल पंजाब सरकार की ओर से पर्ल्स ग्रुप की संपत्तियों को जब्त करने का प्रोसेस शुरू कर दिया गया था, जिससे अरबों के इस चिटफंड घोटाले में फंसे लोगों के पैसों को वापस लौटाया जा सके। पंजाब के कई जिलों में पर्ल्स ग्रुप की संपत्तियों की पहचान की गई है और इन संपत्तियों को बेचने के लिए कानूनी प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
सीबीआई की ओर से 19 फरवरी, 2014 को इस घोटाले की जांच शुरू की गई थी। इसमें आरोप है कि पर्ल्स ग्रुप ने अपने दो फ्लैगशिप कंपनियों - पीजीएफ लिमिटेड और पीएसीएल लिमिटेड के माध्यम से पोंजी स्कीम चलाकर करीब 5.5 करोड़ निवेशकों के साथ अरबों रुपये की धोखाधड़ी की है।
पोंजी स्कीम घोटाले का यह मामला उच्चतम न्यायालय तक गया है। सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के बाद केंद्रीय एजेंसी की ओर से कोर्ट केस दर्ज किया गया है। सीबीआई द्वारा पर्ल्स ग्रुप के डायरेक्टर हरचंद सिंह गिल को भी गिरफ्तार किया गया था। हरचंद सिंह गिल को 'ऑपरेशन त्रिशूल' के तहत फिजी से डिपोर्ट किया गया था।
पंजाब के बरनाला का रहने वाला निर्मल सिंह भंगू पहले साइकिल से दूध बेचा करता था। 70 के दशक में वह नौकरी के लिए कलकत्ता चला गया। यहां उसने पियरलेस कंपनी में कुछ साल काम किया। इसके बाद हरियाणा की ठग कंपनी गोल्डन फॉरेस्ट इंडिया लिमिटेड में काम किया। कंपनी बंद होने पर बेरोजगार हुआ तो उसने भी कंपनी का तरीका अपना कर 1980 में पर्ल्स गोल्डन फॉरेस्ट (पीजीएफ) नाम की कंपनी बनाई। इसके बाद इसने सागौन के पेड़ में निवेश के नाम पर खूब ठगी की। 1996 में करोड़ों रुपए की हेराफेरी में इसने इस कंपनी को बंद कर दिया। इसके बाद रियल स्टेट कंपनी के नाम पर ठगी शुरू की। इसी मामले में यह जेल की सजा काट रहा था।