scriptयूं ही नहीं मैं ‘नालंदा’ कहलाता हूं, दुनिया को शिक्षित करता था, हूं और रहूंगा | PM Modi inaugurate new building world oldest university Nalanda tomorrow in bihar | Patrika News
राष्ट्रीय

यूं ही नहीं मैं ‘नालंदा’ कहलाता हूं, दुनिया को शिक्षित करता था, हूं और रहूंगा

Bihar: नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना 450 ई. में गुप्त सम्राट कुमारगुप्त प्रथम ने की थी। बाद में इसे हर्षवर्धन और पाल शासकों का भी संरक्षण मिला।

पटनाJun 18, 2024 / 07:07 pm

Prashant Tiwari

बिहार का नालंदा विश्वविद्यालय एक समय दुनिया के लिए शिक्षा का सबसे बड़ा केंद्र हुआ करता था। 815 साल के लंबे इंतजार के बाद यह शिक्षा का केंद्र एक बार फिर से अपने पुराने स्वरूप में लौट रहा है। इसके परिसर का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा होना है। पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के सपनों का नालंदा विश्वविद्यालय अब साकार रूप ले रहा है।
 PM Modi inaugurate new building world oldest university Nalanda tomorrow in bihar
दुनिया का पहला विश्वविद्यालय जहां स्टूडेंट और शिक्षक साथ रहते थे

नालंदा विश्वविद्यालय का इतिहास, शिक्षा के प्रति भारतीय दृष्टिकोण और इसकी समृद्धि को दर्शाता है। इसका महत्व न केवल भारत के लिए, बल्कि पूरे विश्व के लिए अनमोल धरोहर के रूप में है। नालंदा विश्वविद्यालय प्राचीन भारत का एक प्रमुख और ऐतिहासिक शिक्षा केंद्र था। इसे दुनिया का पहला आवासीय विश्वविद्यालय माना जाता है, जहां छात्र और शिक्षक एक ही परिसर में रहते थे। यहां एक समय में 10,000 से अधिक छात्र और 2,700 से अधिक शिक्षक होते थे। छात्रों का चयन उनकी मेधा के आधार पर होता था और इनके लिए शिक्षा, रहना और खाना निःशुल्क था। इस विश्वविद्यालय में केवल भारत से ही नहीं, बल्कि कोरिया, जापान, चीन, तिब्बत, इंडोनेशिया, ईरान, ग्रीस, मंगोलिया आदि देशों से भी छात्र आते थे।
 PM Modi inaugurate new building world oldest university Nalanda tomorrow in bihar
गुप्त सम्राट कुमारगुप्त प्रथम ने की थी विश्वविद्यालय की स्थापना

नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना 450 ई. में गुप्त सम्राट कुमारगुप्त प्रथम ने की थी। बाद में इसे हर्षवर्धन और पाल शासकों का भी संरक्षण मिला। इस विश्वविद्यालय की भव्यता का अनुमान इससे लगाइए कि इसमें 300 कमरे, 7 बड़े कक्ष और अध्ययन के लिए 9 मंजिला एक विशाल पुस्तकालय था, जिसमें 3 लाख से अधिक किताबें थीं।
धर्म गूंज नाम की लाइब्रेरी थी

नालंदा विश्वविद्यालय में साहित्य, ज्योतिष, मनोविज्ञान, कानून, खगोलशास्त्र, विज्ञान, युद्धनीति, इतिहास, गणित, वास्तुकला, भाषाविज्ञान, अर्थशास्त्र, चिकित्सा आदि विषय पढ़ाए जाते थे। इस विश्वविद्यालय में एक ‘धर्म गूंज’ नाम की लाइब्रेरी थी, जिसका अर्थ ‘सत्य का पर्वत’ था। इसके 9 मंजिल थे और इसे तीन भागों में विभाजित किया गया था : रत्नरंजक, रत्नोदधि और रत्नसागर।
 PM Modi inaugurate new building world oldest university Nalanda tomorrow in bihar
बख्तियार खिलजी ने नालंदा में लगाई थी आग

1193 में बख्तियार खिलजी के आक्रमण के बाद नालंदा विश्वविद्यालय को बर्बाद कर दिया गया था। यहां विश्वविद्यालय परिसर और खासकर इसकी लाइब्रेरी में आग लगाई गई, जिसमें पुस्तकालय की किताबें हफ्तों तक जलती रहीं। इसी नालंदा विश्वविद्यालय में हर्षवर्धन, धर्मपाल, वसुबन्धु, धर्मकीर्ति, नागार्जुन जैसे कई महान विद्वानों ने शिक्षा प्राप्त की थी। खुदाई में नालंदा विश्वविद्यालय के अवशेष 1.5 लाख वर्ग फीट में मिले हैं, जो इसके विशाल और विस्तृत परिसर का केवल 10 प्रतिशत हिस्सा माना जाता है। अब प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय की तर्ज पर नई नालंदा यूनिवर्सिटी बिहार के राजगीर में 25 नवंबर 2010 को स्थापित की गई।

Hindi News/ National News / यूं ही नहीं मैं ‘नालंदा’ कहलाता हूं, दुनिया को शिक्षित करता था, हूं और रहूंगा

ट्रेंडिंग वीडियो