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PMJAY : आयुष्मान भारत योजना में अब होगा 10 लाख का बीमा! तीन साल में लाभार्थी होंगे तीन गुणा

PMJAY : इस समय देश के 12 करोड़ परिवारों को प्रति वर्ष 5 लाख रुपए प्रति परिवार का स्वास्थ्य कवरेज मिलता है। अभी आयुष्मान भारत योजना में 70 करोड़ लोगों को केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के तहत मिला व्यापक स्वास्थ्य कवरेज मिल चुका है। 25 करोड़ से अधिक गरीबों यानी 50 फीसदी गरीब परिवारों के पास आयुष्मान भारत कार्ड है।

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इस बार देश में एनडीए गठबंधन की सरकार बनी है। ऐसे में 23 जुलाई को पेश होने वाला आम बजट लुभावना होने की उम्मीद है। मोदी सरकार आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोज्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) के के तहत बीमा कवरेज को सालाना 5 लाख रुपए से बढ़ाकर 10 लाख रुपए करने की तैयारी में है।

सरकार शुरुआत में 70 साल से अधिक उम्र के सभी लोगों को इसके दायरे में लाने पर मंथन कर रही है, जिसका जिक्र राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने संसद की संयुक्त बैठक में अपने अभिभाषण में किया था। सरकार इस योजना के लाभार्थियों की संख्या अगले 3 साल में दोगुना करने पर विचार कर रही है।

यदि इन प्रस्तावों को मंजूरी दी जाती है तो राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के अनुमान के अनुसार, सरकारी खजाने पर प्रति वर्ष 12,076 करोड़ रुपए का अतिरिक्त खर्च आएगा। सूत्रों ने कहा, एबी-पीएमजेएवाई के तहत लाभार्थियों की संख्या दोगुना करने से देश की दो-तिहाई से अधिक आबादी को स्वास्थ्य कवर मिलेगा। भारतीय परिवारों को कर्ज के दलदल में धकेलने वाले सबसे बड़े कारणों में बीमारी के इलाज पर होने वाला मोटा खर्च शामिल है। बजट में इन प्रस्तावों या इसके कुछ हिस्सों की घोषणा होने की उम्मीद है।

नीति आयोग ने दिया था सुझाव

रिपोर्ट के मुताबिक, 70 वर्ष से अधिक उम्र वालों को इस योजना में शामिल करने से आयुष्मान भारत के लाभार्थियों की संख्या लगभग 5 करोड़ बढ़ जाएगी। नीति आयोग ने अक्टूबर 2021 में प्रकाशित ‘भारत के लापता मध्य के लिए स्वास्थ्य बीमा’ शीर्षक वाली रिपोर्ट में इस योजना का विस्तार करने का सुझाव दिया था। इसमें कहा गया था कि देश की लगभग 30त्न आबादी स्वास्थ्य बीमा से वंचित है, जो भारतीय आबादी में स्वास्थ्य बीमा कवरेज में अंतर को उजागर करती है। नीति आयोग ने कहा था कि 20त्न आबादी कंपनियों के ग्रुप इंश्योरेंस और निजी स्वैच्छिक स्वास्थ्य बीमा के माध्यम से कवर की जाती है, जो मुख्य रूप से उच्च आय समूहों के लिए तैयार की गई है।

हेल्थ इंश्योरेंस पर टैक्स छूट बढ़ाने की मांग

इंश्योरेंस कंपनियों ने केंद्र सरकार से हेल्थ इंश्योरेंस के प्रीमियम पर मिलने वाली टैक्स छूट बढ़ाने की मांग की है। अभी इनकम टैक्स की पुरानी व्यवस्था में कोई भी व्यक्ति सेक्शन 80डी के तहत हेल्थ इंश्योरेंस के प्रीमियम पर 25,000 रुपए तक का डिडक्शन क्लेम कर सकता है, जिसे 50,000 रुपए करने की मांग है। इंश्योरेंस उद्योग से जुड़े एक्सपट्र्स ने सीनियर सिटीजंस के लिए डिडक्शन की सीमा 50,000 से बढ़ाकर 75,000 हजार रुपए करने की मांग की है, क्योंकि हाल के दिनों में बीमा प्रीमियम काफी बढ़ गया है। उनका तर्क है कि प्रीमियम पर डिडक्शन लिमिट बढ़ाने से बुजुर्ग पर्याप्त कवरेज लेंगे, जिससे हेल्थकेयर से जुड़े खर्चों में हुई वृद्धि को कवर किया जा सकेगा।

जीएसटी कम करने की डिमांड

गैर-जीवन बीमा कंपनियों ने हेल्थ इंश्योरेंस प्रोडक्ट पर जीएसटी को घटाकर 5त्न करने की मांग दोहराई है। अभी हेल्थ इंश्योरेंस पर 18त्न जीएसटी देना होता है। जीएसटी दर घटाने से हेल्थ इंश्योरेंस को आम आदमी के लिए किफायती बनाने में मदद मिलेगी। इंश्योरेंस इंडस्ट्री सरकार से न्यू टैक्स रिजीम में बदलाव कर लाइफ इंश्योरेंस प्रोडक्ट पर सेक्शन 80डी के तहत टैक्स छूट देने की मांग कर रही है।