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राहुल गांधी मामले में अधीर रंजन चौधरी को प्रल्हाद जोशी का कड़ा जवाब, बोले- बेबुनियाद और अनाप-शनाप आरोप लगाना सही नहीं

Parliament Budget Session राहुल गांधी के भाषण के हटाए गए अंश पर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक विवाद लगातार जारी है। कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर हटाए गए अंशों को दोबारा जोड़ने की मांग की है। इस पर प्रल्हाद जोशी ने कड़ा जवाब दिया।

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राहुल गांधी मामले में अधीर रंजन चौधरी को प्रल्हाद जोशी का कड़ा जवाब, बोले- बेबुनियाद और अनाप-शनाप आरोप लगाना सही नहीं

संसद में बजट सत्र 2023 जारी है। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में दोनों सदनों के पीठासीन अधिकारियों ने गुरुवार को राज्यसभा में कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में राहुल गांधी के भाषण के कुछ हिस्सों को निकाले जाने के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक विवाद लगातार जारी है। इसके बाद कांग्रेस ने अपनी नाराजगह व्यक्त की। गुरुवार को ही लोकसभा में कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर कहा कि, संविधान निर्माताओं ने निर्वाचित सदस्यों को बिना किसी डर या पक्षपात के संसद में बोलने का अधिकार दिया है। उन्हें राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव में दिए गए राहुल गांधी के भाषण के कुछ हिस्सों को रिकार्ड से हटाने के अपने फैसले पर फिर से विचार करना चाहिए। अधीर रंजन चौधरी के लोक सभा अध्यक्ष को लिखे गए पत्र पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि, सरकार आलोचना सुनने के लिए तैयार है लेकिन बिना किसी प्रमाणिकता के निराधार, बेबुनियाद और अनाप-शनाप आरोप लगाना सही नहीं है।

लगता है कि हम किसी नए देश में आ गए हैं - अधीर रंजन चौधरी

कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने शुक्रवार को एक बार फिर अपना पक्ष रखते हुए कहाकि, राहुल गांधी के भाषण में कुछ भी मनगढ़ंत नहीं था। उन्होंने वही कहा जो हिंडनबर्ग की रिपोर्ट में था। संविधान में सदन के अंदर हमें अपनी बात रखने का अधिकार है। PM और सत्ता पक्ष के लोग भी बहुत असंसदीय बात करते हैं। ऐसा लगता है कि हम किसी नए देश में आ गए हैं।

असंसदीय भाषा और शब्दों को रिकॉर्ड से हटाने की परंपरा है - अर्जुन राम मेघवाल

राहुल गांधी के भाषण की एक बार फिर से आलोचना करते हुए केंद्रीय संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने भी कहा कि, जब वो बिना किसी तथ्यों और सबूतों के बेबुनियाद आरोप लगा रहे थे, उसी समय उनसे अपनी बातों को प्रमाणित करने के लिए कहा गया था लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। मेघवाल ने भाषण के कुछ हिस्सों को हटाने को सही बताते हुए आगे कहा कि जब से यह संसद बनी है तबसे ही असंसदीय भाषा और शब्दों को रिकॉर्ड से हटाने की एक परंपरा रही है।

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