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प्रवासी भारतीय दिवस आजः प्रवासी भारतीय बने देश की अर्थव्यवस्था, साख और प्रगति के अघोषित राजदूत

आज दुनिया के हर कोने में भारतीयों का डंका बज रहा है। $130 अरब की विदेशी कमाई भेजने से लेकर बड़े-बड़े देशों की नीतियां तय करने तक, प्रवासी भारतीय हमारे देश के असली गौरव हैं।

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Pravasi Bharatiya Divas

प्रवासी भारतीय दिवस (File Photo - IANS)

Pravasi Bharatiya Divas 2026: आज का भारत सिर्फ अपनी भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं है। वॉल स्ट्रीट की नीतियों से लेकर सिलिकॉन वैली के नवाचार तक, हर निर्णायक मंच पर भारतीय मेधा की मौजूदगी है। 9 जनवरी प्रवासी भारतीय दिवस, इसी ‘ग्लोबल इंडिया’ को सम्मान देने का अवसर है। करोड़ों प्रवासी भारतीय, जो भले ही देश से दूर हों, लेकिन अर्थव्यवस्था, कूटनीति और भारत की वैश्विक साख को मजबूती देने में सबसे आगे हैं। सवाल अब ‘ब्रेन ड्रेन’ का नहीं, बल्कि ‘ब्रेन पावर’ के सही उपयोग का है।

इकॉनमी का पावरहाउस: रेमिटेंस में ऐतिहासिक रिकॉर्ड

  • भारत प्रवासी रेमिटेंस के मामले में दुनिया का पहला देश बन गया है।
  • $130 अरब से अधिक की रेमिटेंस (2024): रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार यह राशि भारत की जीडीपी का 3% से अधिक है।
  • विदेशी मुद्रा का सुरक्षा कवच: वैश्विक अस्थिरता, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल या निर्यात में गिरावट के दौर में प्रवासियों का धन रुपये को स्थिर रखने में अहम भूमिका निभाता है।
  • केरल मॉडल: केरल, पंजाब और गुजरात जैसे राज्यों की अर्थव्यवस्था की रीढ़ ही प्रवासी धन है, जिसने उपभोग, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्रों को मजबूती दी है

‘ब्रेन ड्रेन’ बनाम ‘ब्रेन गेन’: गर्व के साथ चिंता का पक्ष भी मौजूद

  • नागरिकता का त्याग: 2024 में 2 लाख से अधिक लोगों ने भारतीय नागरिकता छोड़ी, जिनमें बड़ी संख्या स्किल्ड प्रोफेशनल्स और उच्च नेटवर्थ व्यक्तियों की है।
  • विदेश जाने के कारण: बेहतर जीवन स्तर, बच्चों की शिक्षा, स्वच्छ वातावरण और टैक्स सिस्टम में स्पष्टता प्रमुख वजहें हैं।
  • रिवर्स माइग्रेशन: सकारात्मक संकेत यह है कि ‘ब्रेन सर्कुलेशन’ बढ़ रहा है। कई प्रवासी पूंजी और अनुभव के साथ लौटकर भारत में स्टार्टअप्स और टेक हब खड़े कर रहे हैं

कूटनीतिक कवच: प्रवासी बने अघोषित राजदूत

  • अमरीका में ‘हिंदू कॉकस’ और ब्रिटेन में भारतीय मूल के सांसद भारत के पक्ष में नीतिगत माहौल बनाने में सहायक हैं। यह प्रवासी भारतीयों की लॉबिंग की ताकत है।

भारत भी संकट में साथ

  • यूक्रेन युद्ध और सूडान संकट के दौरान ‘ऑपरेशन गंगा’ व ‘ऑपरेशन कावेरी’ ने दिखाया कि भारत अपने प्रवासियों के लिए वैश्विक स्तर पर कितनी प्रभावी कार्रवाई कर सकता है।

डेटा गैलरी: एक नजर में

  • कुल प्रवासी आबादी: 3.54 करोड़ (दुनिया में सबसे अधिक)
  • वार्षिक रेमिटेंस: $130 अरब (आरबीआइ, 2024)
  • फॉर्च्यून 500: 11 वैश्विक कंपनियों के सीईओ भारतीय मूल के

खाड़ी के ब्लू-कॉलर श्रमिक: अनकहे नायक

  • यूएई, सऊदी अरब और कतर में काम कर रहे करीब 90 लाख भारतीय श्रमिक विदेशी मुद्रा भंडार के असली रक्षक हैं।
  • 60–75% कमाई भारत भेजते हैं: नागरिकता न मिलने के कारण उनकी बचत सीधे देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करती है।

दूसरों का ख्याल रखना भारतीयों के डीएनए में

फोरसाइट मल्टीमीडिया ग्रुप व प्रकाशक, द साउथ एशियन टाइम्स की चेयरमैन कमलेश सी. मेहता ने कहा, भारतीय-अमरीकी प्रवासी आज हर महत्वपूर्ण क्षेत्र में अग्रणी हैं, जिनकी संपत्ति और विद्वता ने आधुनिक भारत के विकास को गहराई से प्रभावित किया है। अमरीका ने लाखों प्रतिभाओं को अवसर दिए और उनकी सफलता अंततः पूरे विश्व के कल्याण का माध्यम बनी है। आप एक भारतीय को भारत से दूर कर सकते हैं, पर उसके भीतर से भारत को नहीं। हम भारत और अमरीका दोनों से समान प्रेम करते हैं, दूसरों का ख्याल रखना हमारे डीएनए में है। बता दें कि कमलेश सी. मेहता, मूलतः ब्यावर (राजस्थान) की है, जो पिछले 40 वर्षों से न्यूयॉर्क में प्रतिष्ठित जौहरी हैं और भारतीय समुदाय की सशक्त आवाज हैं।)

देश के बाहर भी सोशल मीडिया पर प्रतिनिधित्व

वहीं मूलतः उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के रहने वाले शिव त्रिपाठी, जो पिछले 12 साल से दुबई में नौकरी करते हैं, ने कहा कि आज का प्रवासी केवल पैसा नहीं भेजता, वह सोशल मीडिया पर भारत का नैरेटिव भी सेट करता है। 'डिजिटल डायस्पोरा' दुनिया भर में भारत के सांस्कृतिक हितों और भू-राजनीतिक स्टैंड का बचाव करने वाला सबसे बड़ा सोशल मीडिया बेस बन गया है।


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