
कर्नाटक के निजी मेडिकल कॉलेजों ने एनआरआई कोटे की मेडिकल सीटों की फीस बढ़ा दी है। ( फोटो: X Handle careers360.)
Private medical college fee hike NRI management quota India: आम तौर पर प्रवासी और अप्रवासी भारतीयों का यह मानना है कि भारत में दूसरे देशों के मुकाबले एजुकेशन बहुत सस्ती है और एनआरआईज अपने लाडले और लाडली को अपनी धरती अपने हिंदुस्तान में एजुकेशन दिलवाना चाहते हैं, लेकिन भारत में कई निजी मेडिकल कॉलेजों ने एनआरआई और मैनेजमेंट कोटे की सीटों की फीस ₹1 लाख से ₹6 लाख तक इजाफा कर दिया है। सरकार की तय सीमा ₹45 लाख के बावजूद कुछ कॉलेजों ने इससे ज्यादा फीस वसूली है। सरकार ने इस वर्ष सरकारी और निजी कोटे की सीटों की फीस नहीं बढ़ाने का आदेश दिया था, लेकिन मैनेजमेंट और एनआरआई कोटे में निजी कॉलेजों ने मनमाने ढंग से फीस बढ़ाई है। इन सीटों की फीस सभी कॉलेजों में समान नहीं है, जिससे उम्मीदवार कशमकश में हैं।
अब कर्नाटक के निजी मेडिकल कॉलेजों ने मैनेजमेंट और एनआरआई कोटे की मेडिकल सीटों की फीस में 1 लाख से 6 लाख रुपये तक की बढ़ोतरी कर दी है। जबकि राज्य सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इन सीटों की सालाना फीस 45 लाख से अधिक नहीं होनी चाहिए, कई कॉलेजों ने इस सीमा को पार कर दिया है।
बेंगलुरु की PES यूनिवर्सिटी ने इस साल मैनेजमेंट और एनआरआई कोटे की फीस 33.15 लाख से बढ़ा कर 39.15 लाख रुपये कर दी है। वहीं श्री मधुसूदन साईं मेडिकल कॉलेज, चिकबल्लापुर ने अपनी फीस 45 लाख रुपये कर दी है। एसडीएम मेडिकल कॉलेज, धारवाड़ में फीस 35.15 लाख रुपये हो गई है, जबकि बीजीएस मेडिकल कॉलेज ने भी अपनी फीस 3 लाख रुपये से बढ़ा कर 35.15 लाख रुपये कर दी है।
जहां एक ओर अधिकतर कॉलेजों ने फीस बढ़ाई है, वहीं कुछ अल्पसंख्यक मेडिकल कॉलेजों ने फीस में कटौती की है। बेंगलुरु के आकाश मेडिकल कॉलेज ने अपनी फीस में 4 लाख की कमी की है। अल-अमीन मेडिकल कॉलेज, विजयपुरा ने अपनी फीस 30.12 लाख से घटाकर 27.11 लाख कर दी है।
सप्तगिरी मेडिकल कॉलेज 45.40 लाख और एमएस रामैया मेडिकल कॉलेज 45.15 लाख फीस ले रहे हैं, जो सरकार की सीमा से अधिक है। इससे सरकार पर नियमन लागू करने का दबाव बढ़ गया है।
सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एक साल की फीस 64,350 रुपये है। वहीं, निजी कॉलेजों में सरकारी कोटे की सीटों के लिए 1,53,571 रुपये तय की गई है।
भारत से बाहर रहने वाले प्रवासी भारतीयों (NRI) की संख्या करोड़ों में है। कई देशों में भारतीय मूल के लोगों की बड़ी आबादी रहती है, जो पढ़ाई, नौकरी या व्यवसाय के लिए बाहर गए हैं। भारत सरकार, विदेश मंत्रालय और यूएन डाटा के अनुसार कुछ प्रमुख देशों में एनआरआई की अनुमानित संख्या इस प्रकार है:
यूएई (संयुक्त अरब अमीरात) – करीब 35 लाख भारतीय, देश की कुल आबादी का लगभग 35%.
अमेरिका – लगभग 20 लाख एनआरआई, प्रवासी भारतीयों की दूसरी सबसे बड़ी संख्या।
सऊदी अरब – लगभग 24 लाख भारतीय मूल के लोग।
यूके (ब्रिटेन) – लगभग 18 लाख भारतीय मूल के लोग, जिनमें बड़ी संख्या NRI की है।
कनाडा – करीब 10 लाख भारतीय।
मलेशिया, नेपाल, कुवैत, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भी लाखों की संख्या में एनआरआई बसे हैं।
अमेरिका और कनाडा ने हाल के वर्षों में स्टूडेंट वीजा और वर्क वीजा के लिए जांच प्रक्रिया कड़ी की है।यूके ने कुछ क्षेत्रों में वीजा की शर्तें संशोधित की हैं, खासकर पार्टनर और डिपेंडेंट वीजा में शर्तें संशोधित की हैं।कुछ खाड़ी देशों में वीजा प्रक्रिया मेडिकल फिटनेस और रोजगार अनुबंध पर निर्भर करती है। इन बदलावों का असर सभी अप्रवासियों पर होता है, केवल भारतीयों पर नहीं।
यहाँ मेडिकल और डेंटल कॉलेजों ने फीस में लगभग 10–12% बढ़ोतरी की है। कुछ मैनेजमेंट कोटा सीटों की फीस अब ₹1 करोड़ तक पहुँच गई है, जो छात्रों और अभिभावकों के लिए भारी बोझ है।
2.तमिलनाडु में एजुकेशन
यहाँ मैनेजमेंट कोटे की फीस बढ़ाकर ₹15 लाख/साल कर दी गई है।
एनआरआई सीटों की फीस ₹27 लाख, और यूनिवर्सिटी कोटे के लिए ₹30 लाख/साल हो गई है।
सरकारी कोटे की फीस में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
कर्नाटक: कई निजी रेलवे स्टेशनों में एनआरआई कोटा उपलब्ध सीटें हैं।
(एसडीएम, पीईएस, एमएसआरएमसी आदि)।
गुजरात: जीसीएस, पारुल यूनिवर्सिटी, एएमसी मेट।
तमिल: एसआरएम, सविता, मीनाक्षी, रामचन्द्र।
महाराष्ट्र: डीवाई पाटिल, भारती विद्यापीठ।
दिल्ली एनसीआर: हमदर्द इंस्टीट्यूट, शारदा विश्वविद्यालय।
केरल, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना: भी सक्रिय रूप से एनआरआई कोटा सीट ऑफर करते हैं।
एनआरआई कोटा की फीस सामान्य से 5–10 गुना अधिक होती है।
औसतन ₹20 लाख से ₹45 लाख प्रतिवर्ष तक — कॉलेज और राज्य पर निर्भर है।
कुछ कॉलेजों में यह फीस ₹1 करोड़ तक भी जाती है (जैसे गुजरात, तमिलनाडु के कुछ प्राइवेट कॉलेजों में)
Updated on:
25 Jul 2025 01:01 pm
Published on:
25 Jul 2025 11:33 am
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