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काम में देरी से दिल्ली मेट्रो की बढ़ी लागत, अब 1568 करोड़ एक्सट्रा होंगे खर्च

पर्यावरण मंजूरी में कथित देरी के कारण दिल्ली मेट्रो के नेटवर्क से संबंधित कम से कम नौ परियोजनाओं के निर्माण की लागत लगभग 15 प्रतिशत बढ़ गई है। सूत्रों के अनुसार, करीब 2,500 पेड़ बीच में आ रहे है, इनको हटाया या स्थानांतरित किया जाएगा।

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Delhi Metro Rail Corporation

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तीन आगामी मेट्रो कॉरिडोर के रास्ते से हटाए वाले पेड़ों को गिराने और स्थानांतरित करने की अनुमति देने में देरी के परिणामस्वरूप न केवल लगभग 15% की लागत में वृद्धि हुई है, बल्कि कुछ मामलों में 30 महीने तक की काफी देरी भी हुई है। अधिकारियों ने कहा कि तीन लाइनें 10,479.6 करोड़ रुपये की लागत से पूरी की गई होंगी। लेकिन अब लागत 12,048.5 करोड़ रुपये से कम नहीं होगी, जिससे लगभग 1,568.8 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च होगा।


अपने चरण-IV विस्तार योजना के तहत, दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन छह गलियारों का निर्माण कर रहा है। तुगलकाबाद से एरोसिटी, इंदरलोक से साकेत जी-ब्लॉक, मुकुंदपुर से मौजपुर, जनकपुरी पश्चिम से आरके आश्रम और रिठाला से बवाना और नरेला तक करीब 103.9 किमी की परियोजना है। इनमें से तीन लाइनों- एरोसिटी से तुगलकाबाद, मुकुंदपुर से मौजपुर और जनकपुरी वेस्ट से आरके आश्रम तक को प्राथमिकता कॉरिडोर के रूप में वर्गीकृत किया गया है। केंद्र ने मार्च 2019 में निर्माण को मंजूरी दी थी।


सूत्रों के अनुसार, करीब 2,500 पेड़ बीच में आ रहे है। इनको गिराने या स्थानांतरित करने के लिए दिल्ली सरकार को पर्यावरण और वन विभाग से अनुमति नहीं मिली है। इसलिए निर्माण काम अटका पड़ा है। एलजी वीके सक्सेना के लगातार और निर्णायक हस्तक्षेप के कारण बाधाएं आखिरकार हटा दी गईं। उन्होंने मुख्यमंत्री को दो बार पत्र लिखा और उनके साथ आमने-सामने की मुलाकात में इस मुद्दे को उठाया।


बताया जा रहा है कि काम में देरी के कारण लागत में करीब 15 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। इन कॉरिडोर पर काम की दोबारा निविदा के परिणामस्वरूप नई बोलियां उस लागत को और बढ़ा सकती हैं जिसे दिल्ली मेट्रो को वहन करना होगा। सूत्रों ने कहा कि पेड़ों को गिराने और स्थानांतरित करने के लिए पर्यावरण और वन विभाग की मंजूरी मांगने वाली कुछ फाइलें 30 महीने तक लंबित थीं।