
पुणे निगम में हेलमेट पहनकर पहुंचे विपक्षी पार्षद। BJP पर धमकाने का लगाया आरोप (सोर्स: ANI)
Pune Municipal Corporation Helmet Protest: पुणे म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन की बैठक सोमवार को हुई। इस दौरान कांग्रेस और NCP (SP) के कई विपक्षी पार्षद हेलमेट और काली पट्टी पहनकर सदन में पहुंचे। उनका कहना था कि नगर निगम के अंदर विपक्षी नेताओं के लिए माहौल सुरक्षित नहीं रह गया है। पार्षदों ने BJP नेताओं पर धमकी देने और डराने का आरोप लगाया।
वहीं कांग्रेस पार्षद और पुणे शहर कांग्रेस अध्यक्ष प्रशांत जगताप ने कहा कि हेलमेट पहनना केवल एक प्रतीकात्मक विरोध है। उनका दावा है कि पिछली जनरल बॉडी मीटिंग में हुई हाथापाई और हंगामे के बाद विपक्षी नेताओं में डर का माहौल है। इसी वजह से उन्होंने यह संदेश देने के लिए हेलमेट पहनकर बैठक में हिस्सा लिया कि सदन में लोकतांत्रिक माहौल कमजोर हो रहा है।
बता दें यह विवाद पिछले महीने एक पुरानी दरगाह को गिराए जाने के बाद शुरू हुए राजनीतिक तनाव से जुड़ा है। उस मुद्दे पर हुई बैठक में जमकर बहस, नारेबाजी और धक्का-मुक्की देखने को मिली थी। हालांकि BJP नेताओं ने विपक्ष के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया। उनका कहना है कि यह सिर्फ राजनीतिक ड्रामा है और जनता का ध्यान खींचने की कोशिश की जा रही है।
इसी बीच महाराष्ट्र की राजनीति में एक और बड़ा घटनाक्रम सामने आया। शिवसेना (UBT) के छह सांसद आधिकारिक तौर पर एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हो गए। इस फैसले ने उद्धव ठाकरे गुट को बड़ा झटका दिया है।
मीडिया से बातचीत में उद्धव ठाकरे ने कहा कि वह जल्द ही पूरे मामले पर विस्तार से अपनी बात रखेंगे। उन्होंने फिलहाल ज्यादा टिप्पणी करने से बचते हुए संकेत दिया कि पार्टी सही समय पर जवाब देगी। दूसरी ओर, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने नए सांसदों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इन नेताओं के आने से संसद में पार्टी की ताकत और बढ़ेगी। शिंदे का दावा है कि यह कदम किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि विकास और पार्टी की मूल विचारधारा को आगे बढ़ाने के लिए उठाया गया है।
शिंदे ने यह भी कहा कि 2022 में शुरू हुआ राजनीतिक आंदोलन अब दूसरे चरण में पहुंच गया है। उनके मुताबिक, असली शिवसेना और बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा को बचाने के लिए यह जरूरी कदम था।
हालांकि इस घटनाक्रम के बाद दोनों गुटों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। उद्धव ठाकरे गुट इसे विश्वासघात बता रहा है, जबकि शिंदे गुट का कहना है कि सांसदों ने नेतृत्व और विकास के मुद्दों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया है।
Published on:
22 Jun 2026 10:12 pm
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