
रामलला प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होने वाले मेहमान को एक सीक्रेड कोड मिलेगा।
22 जनवरी को रामलाल की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा समारोह और मंदिर के उद्घाटन के मौक़े पर विश्व के तमाम अति महत्वपूर्ण अतिथी आ रहे हैं। इसको लेकर उत्तर प्रदेश सरकार के साथ साथ केंद्र सरकार और सभी खुफिया एजेंसियां सक्रिय हैं। समारोह को हर तरीके से सुरक्षित रखने की पूरी तैयारी हो चुकी है। बिना किसी चूक और अफ़रातफ़री के मेहमानों को कार्यक्रम स्थल पर ले जाया जाएगा। यहां आने वाले अतिविशिष्ट लोगों को कोई तकलीफ न हो इसके लिए सुरक्षा एजेंसियों ने ख़ास तैयारी की है।
इसके बारे में अयोध्या के कमिश्नर गौरव दयाल ने पत्रिका से खास बातचीत में कुछ जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विशिष्ट मेहमान अयोध्या आएँगे, उसे रिसीव करने के साथ ही एक कोड code दिया जाएगा। इस कोड के आधार पर उनके बैठने की व्यवस्था की जाएगी। ये कोड ही हर जगह सुरक्षा में तैनात कर्मियों को दिखाना होगा। जिसे स्कैन करके मेहमानों को उनके गंतव्य पर पहुंचाया जाएगा।
कमिशनर दयाल ने बताया कि कि वाराणसी के पुजारी प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम को संपन्न कराएंगे। उनके साथ 4 ट्रस्टी और 4 पुजारी भी रहेंगे। कार्यक्रम के दौरान मंदिर में बने पांच मंडपों में अलग-अलग सोशल कम्यूनिटी के 15 दंपत्ति भी उपस्थित रहेंगे।
मंदिर प्रांगण में 7500 लोग करेंगे प्रवेश
अयोध्या के मंडलायुक्त गौरव दयाल ने बताया कि 22 जनवरी को प्राण प्रतिष्ठा के कार्यक्रम में 7500 लोगों को मंदिर प्रागण में बिठाने की व्यवस्था की गई है।
प्रधानमंत्री कार्यालय भी किया जा रहा है स्थापित
प्रांगण में ही पीएमओ भी स्थापित किया जाएगा, जबकि पीएम मोदी की स्पीच के लिए भी एक स्थान को चिन्हित किया गया है जहां से वो इस ऐतिहासिक अवसर पर पूरी दुनिया को संदेश देंगे। इसके अतिरिक्त, परकोटा ईस्ट में धार्मिक संगीत का भी आयोजन होगा।
कुबेर टीला पर पक्षीराज जटायू की मूर्ति का अनावरण करेंगे पीएम मोदी
22 जनवरी को ही पीएम मोदी अयोध्या के श्रीरामजन्म भूमि परिसर में स्थित कुबेर नवरत्न टीला पर भी जाएंगे, जहां वो पक्षी राज जटायु की मूर्ति का भी अनावरण करेंगे। यह मूर्ति कांस्य की है। यह दिल्ली से बनकर आई है, जिसकी स्थापना का कार्य दिसंबर में हो चुका रहै। पीएम मोदी राम काज के लिए प्राणों की आहुति देने वाले हुतात्माओं की स्मृति के रूप में जटायु राज को पुष्पांजलि भी अर्पित करेंगे। इस मूर्ति को कुबेर नवरत्न टीला के शिखर की बजाय थोड़ा पहले दर्शन मार्ग पर स्थापित किया गया है। यहां पहले से ही मूर्ति स्थापना के लिए चट्टान का निर्माण किया गया था।
Updated on:
13 Jan 2024 08:04 pm
Published on:
13 Jan 2024 07:57 pm
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