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आजाद हिंद फौज बनाने वाले रास बिहारी बोस ने अंग्रेजों के नाक में कर दिया था दम, वायसराय पर फेंका था बम

आजाद हिंद फौज की संस्थापक रास बिहारी बोस को आज गृहमंत्री अमित शाह ने श्रद्धांजलि दी है। बोस ने साल 1912 में भारत के वायसराय लॉर्ड हार्डिंग की हत्या की साजिश रची थी। पढ़ें पूरी खबर...

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रास बिहारी बोस (फोटो- सोशल मीडिया)

Ras Behari Bose: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने आज स्वतंत्रता सेनानी रास बिहारी बोस की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि दी। साथ ही, आजाद हिंद फौज के संस्थापक को याद करते हुए लिखा, 'गदर क्रांति से लेकर आजाद हिंद फौज की स्थापना तक, रास बिहारी बोस ने देश के स्वतंत्रता संग्राम को एक नई दिशा दी। 'इंडियन इंडिपेंडेंस लीग' के जरिए उन्होंने विदेशों में भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के लिए समर्थन और संसाधन जुटाकर आजादी की लड़ाई को और आगे बढ़ाया।

जब वायसराय पर किया था बम से हमला

क्रांतिकारी रास बिहारी बोस ने अंग्रेजों को सीधी चुनौती दी थी। उनका नाम पहली बार साल 1908 के अलीपुर बम केस में सामने आया था। तब युवा क्रांतिकारी ने ब्रिटिश सरकार के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष का रास्ता अपनाया था। बोस के नेतृत्व में उस समय के वायसराय लॉर्ड हार्डिंग की हत्या की योजना बनाई गई। 23 दिसंबर 1912 को रास बिहारी बोस ने बसंत कुमार विश्वास के साथ मिलकर वायसराय की सवारी पर बम फेंका। हालांकि, वायसराय बच गया। इसके बाद रास बिहारी को छिपना पड़ा।

नेताजी की असली ताकत पहचानी थी

आजाद हिंद फौज को नेताजी सुभाष चंद्र बोस के साथ जोड़ा जाता है, लेकिन असल में इसकी स्थापना रास बिहारी बोस ने ही की थी। साल 1924 में रास बिहारी बोस ने भारतीय स्वतंत्रता लीग की स्थापना की थी। उसी साल उनकी मुलाकात सुभाष चंद्र बोस से हुई। नेताजी से मिलने के बाद ही रास बिहारी के मन में भारत को आजाद कराने को लेकर एक फौज बनाने का विचार आया। इसके बाद 1942 में आजाद हिंद फौज की स्थापना हुई। रास बिहारी ने सुभाष चंद्र बोस की क्षमता को पहचाना और उन्हें नेतृत्व सौंप दिया। इससे एक मजबूत सेना बनाने का सपना पूरा हुआ।

21 जनवरी 1945 को जापान में हुआ था निधन

रास बिहारी बोस को भारत और जापान के बीच एक पुल के रूप में भी देखा जाता था। उन्होंने न केवल स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान दिया था, बल्कि भारत और जापान के बीच में दोस्ती भी मजबूत की थी। यह दोस्ती आज भी मजबूत है। जानकारी के अनुसार, जापान प्रवास के दौरान उन्होंने वहां की सत्ता में शामिल लोगों के साथ अच्छ संबंध बनाए थे। इसके कारण उन्हें जापान की नागरिकता भी मिल गई। 21 जनवरी 1945 को जापान में ही रास बिहारी बोस का निधन हो गया।

रास बिहारी बोस ने कहा था, "मातृभूमि के लिए प्यार और समर्पण पूरे देश को प्रेरित करता है।" इसका मतलब है कि हमें हमेशा अपने देश से प्यार करना चाहिए और उसकी सेवा के लिए तैयार रहना चाहिए।