
Ratan Tata - Mohini Dutta: दिवंगत कारोबारी रतन टाटा के करीबी लोग तब हैरान रह गए जब उनकी हाल ही में खोली गई वसीयत में एक रहस्यमयी व्यक्ति का जिक्र किया गया - मोहिनी मोहन दत्ता। दत्ता को टाटा समूह के पूर्व चेयरमैन की बची हुई संपत्ति का एक तिहाई हिस्सा दिया गया है, जिसकी अनुमानित कीमत ₹500 करोड़ से अधिक बताई जा रही है। दत्ता का वसीयत में अप्रत्याशित रूप से शामिल होना टाटा परिवार के लिए एक बड़ा आश्चर्य था। रतन टाटा, जो अपनी निजी जिंदगी को हमेशा गोपनीय रखते थे, उनके बारे में यह नई जानकारी चौंकाने वाली साबित हुई है।
द इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार, जमशेदपुर के एक अपेक्षाकृत कम पहचानने जाने वाले उद्यमी, दत्ता को रतन टाटा ने अपनी वसीयत में ₹500 करोड़ से अधिक की संपत्ति दी थी। यह खबर सभी के लिए चौंकाने वाली थी, क्योंकि रतन टाटा, जिनका अक्टूबर 2024 में निधन हुआ, हमेशा अपने निजी मामलों को गुप्त रखते थे। उनकी वसीयत में दत्ता का नाम आने से हर कोई हैरान था और इसे लेकर तरह-तरह की जिज्ञासाएँ उत्पन्न हुईं।
अब 80 के दशक में पहुँच चुके मोहिनी मोहन दत्ता की पहली मुलाकात रतन टाटा से 1960 के दशक की शुरुआत में जमशेदपुर के डीलर्स हॉस्टल में हुई थी। उस समय, रतन टाटा केवल 24 वर्ष के थे और अपनी बड़ी व्यापारिक दुनिया में जगह बनाने की कोशिश कर रहे थे। इस मुलाकात ने दत्ता के जीवन की दिशा बदल दी और दोनों के बीच एक गहरी मित्रता और साझेदारी का आरंभ हुआ।
अक्टूबर 2024 में रतन टाटा के अंतिम संस्कार के दौरान, दत्ता ने कहा, "हम पहली बार जमशेदपुर में डीलर्स हॉस्टल में मिले थे, जब रतन टाटा 24 साल के थे। उन्होंने मेरी मदद की और मुझे आगे बढ़ाया।" इस बयान से यह स्पष्ट होता है कि दोनों के बीच का संबंध केवल व्यवसायिक नहीं, बल्कि व्यक्तिगत भी था।
दत्ता का पेशेवर जीवन टाटा समूह के साथ जुड़ा रहा। ताज समूह के साथ अपने करियर की शुरुआत करने के बाद, उन्होंने स्टैलियन ट्रैवल एजेंसी की स्थापना की, जो बाद में ताज होटल्स के साथ मिल गई। टाटा इंडस्ट्रीज ने इस व्यवसाय में 80% हिस्सेदारी रखी थी, और बाद में इसे थॉमस कुक (इंडिया) को बेच दिया गया। दत्ता अब टीसी ट्रैवल सर्विसेज़ के निदेशक हैं और टाटा समूह की कंपनियों के शेयरों के मालिक हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, दत्ता और टाटा के बीच एक गहरे पारिवारिक संबंध थे, लेकिन वसीयत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। वसीयत के अनुसार, दत्ता को टाटा की सम्पत्ति के एक तिहाई हिस्से का हकदार बताया गया है, जिसमें ₹350 करोड़ से अधिक की बैंक जमा राशि और पेंटिंग्स, घड़ियाँ जैसी व्यक्तिगत वस्तुओं की नीलामी से प्राप्त आय भी शामिल है।
बाकी दो तिहाई संपत्ति टाटा की सौतेली बहनों, शिरीन जीजीभॉय और डीनना जीजीभॉय को दी गई है, जो वसीयत के निष्पादक भी हैं, साथ ही टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टी डेरियस खंबाटा और मेहली मिस्त्री के साथ।
हालाँकि, द इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, दत्ता का अनुमान है कि उनकी विरासत 650 करोड़ रुपये तक हो सकती है, जो कि निष्पादकों के अनुमानों से मेल नहीं खाता।
रतन टाटा के सौतेले भाई नोएल टाटा और उनके बच्चों का नाम वसीयत में नहीं है, हालांकि जिमी टाटा को ₹50 करोड़ की राशि दी गई है। यह असामान्य वसीयत अब बॉम्बे हाई कोर्ट में प्रोबेट की प्रक्रिया का इंतजार कर रही है, और इस अप्रत्याशित घटनाक्रम को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। क्या यह वसीयत सही है? क्या मोहिनी मोहन दत्ता के रिश्ते और योगदान को सही मायनों में पहचाना गया है? इन सवालों के जवाब अब कोर्ट से ही मिलेंगे, लेकिन फिलहाल तो यह वसीयत सभी के लिए एक बड़ा रहस्य बनी हुई है।
Updated on:
07 Feb 2025 10:34 am
Published on:
07 Feb 2025 10:34 am
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