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RBI MPC Meeting: अभी खूब परेशान करेगी महंगाई, गवर्नर शक्तिकांत दास ने बताया कब तक मिलेगी राहत

RBI MPC Meeting: रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा है कि फिलहाल खुदरा महंगाई से राहत मिलती नहीं दिख रही. इसमें सितंबर 2022 के बाद ही नरमी के संकेत मिल रहे हैं। महंगाइ पर ग्‍लोबल फैक्‍टर का ज्‍यादा असर दिख रहा है।

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RBI MPC Meeting: मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक के बाद रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर शक्तिकांत दास ने बताया कि चालू तिमाही जनवरी-मार्च 2022 में उपभोक्‍ताओं को खुदरा महंगाई (Retail Inflation) बहुत परेशान करेगी। नए वित्‍त वर्ष की शुरुआत के बाद ही इसमें नरमी के संकेत हैं।


आपको बता दें कि इस बैठक में सेंट्रल बैंक ने ब्याज दरों में किसी तरह का बदलाव नहीं किया।आरबीआई ने रेपो रेट 4% पर बरकरार रखा है।वहीं रिवर्स रेपो रेट भी 3.35% पर बना रहेगा।आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि कमिटी ने पॉलिसी दरों में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला किया है।

रिवर्स रेपो रेट 3.35 फीसदी पर स्थित रहेगी। जबकि मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी रेट (MSFR) और बैंक रेट 4.25 फीसदी रहेगा। पॉलिसी का रुख ‘अकोमोडेटिव’ रखा गया है। केंद्रीय बैंक ने लगातार 10वीं बार ब्‍याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। इससे पहले, रिजर्व बैंक ने आखिरी बार 22 मई 2020 को ब्याज दरों में बदलाव किया था।


रेपो रेट वह दर है जिस पर RBI द्वारा बैंकों को कर्ज दिया जाता है। बैंक इसी कर्ज से ग्राहकों को लोन देते हैं। रेपो रेट कम होने का मतलब है कि बैंक से मिलने वाले कई तरह के लोन सस्ते हो जाएंगे। जबकि रिवर्स रेपो रेट इसके उलट होता है। रिवर्स रेपो रेट वह दर है, जिस पर बैंकों की ओर से जमा पर RBI से ब्याज मिलता है। रिवर्स रेपो रेट के जरिए बाजार में लिक्विडिटी कंट्रोल किया जाता है।


आरबीआई के गवर्नर ने कहा कि FY23 में रियल GDP ग्रोथ 7.8 फीसदी रहने का अनुमान है। हालांकि FY23 की दूसरी तिमाही में GDP ग्रोथ अनुमान 7.8 फीसदी से घटकर 7 फीसदी रहने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि FY23 की तीसरी तिमाही में महंगाई दर 4 फीसदी रह सकती है। वहीं FY23 में महंगाई दर 4.5 फीसदी रहने का अनुमान है।


रिजर्व बैंक के गवर्नर ने महंगाई को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्‍होंने कहा कि अगर लोग ये सोचेंगे कि वे जो खाना, सब्‍जी, ईंधन और कपड़े खरीद रहे हैं, वह महंगे हैं तो उनके दिमाग में महंगाई ही घूमेगी। हालांकि, उपभोक्‍ता उत्‍पाद से जुड़ी कंपनियों और टेलीकॉम कंपनियों की ओर से कीमतें बढ़ाने का असर खुदरा महंगाई पर भी जरूर दिखेगा।

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