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मतदान की नई धारा, महिला वोटर्स बन रही हैं लोकतंत्र की किंगमेकर

Gender Politics: 2024 के चुनावों में महिला मतदाताओं का रिकॉर्ड मतदान और सक्रिय भागीदारी ने उन्हें भारतीय राजनीति का निर्णायक वोट बैंक बना दिया है।

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भारत

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Devika Chatraj

Apr 09, 2026

महिला वोटर (IANS)

Women Voters Indian Politics: हर दशक और कभी-कभी हर आधे दशक में भारतीय राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिलते हैं। 2024 के आम चुनावों के बाद से यह बदलाव और भी स्पष्ट हो गया है, खासकर महिला वोटरों की संख्या और उनकी सक्रिय भागीदारी में। अब भारतीय राजनीति में 'आधी आबादी' केवल चुनाव प्रचार का हिस्सा नहीं रही, बल्कि निर्णायक वोट बैंक यानी किंगमेकर बन चुकी है।

महिला वोटरों की बढ़ती ताकत

लोकसभा चुनाव 2024 में एक ऐतिहासिक मोड़ आया जब महिला मतदाताओं का टर्नआउट 65.78% रहा, जो पुरुषों के 65.55% से आगे निकल गया। लगभग 31.2 करोड़ महिलाओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया, जो अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है।

महिला वोटिंग में बढ़ोतरी

यह लहर केवल लोकसभा तक सीमित नहीं रही। विधानसभा चुनाव 2024 में भी महिला वोटिंग का प्रतिशत लगातार बढ़ता गया। झारखंड विधानसभा चुनाव के पहले चरण में महिला मतदान 69.04% रहा, जबकि पुरुषों का प्रतिशत 64.27% था। 43 में से 37 सीटों पर महिलाओं ने पुरुषों से अधिक मतदान किया।

कई राज्यों में महिलाओं ने सक्रिय भागीदारी

महाराष्ट्र और हरियाणा जैसे राज्यों में भी महिलाओं ने सक्रिय भागीदारी दिखाई। विशेष रूप से उन राज्यों में जहां महिला-केंद्रित सीधी नकद हस्तांतरण योजनाएं लागू थीं, वहां मतदान प्रतिशत में अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई।

सरकारी योजनाओं का बड़ा योगदान

एसबीआई की जनवरी 2025 की रिसर्च रिपोर्ट बताती है कि 2019 के मुकाबले 2024 और उसके बाद के चुनावों में महिलाओं के मतदान प्रतिशत में महत्वपूर्ण वृद्धि कोई संयोग नहीं है। इसके पीछे जमीनी स्तर पर काम करने वाली सरकारी योजनाएं हैं।

उदाहरण के तौर पर

  • माझी लड़की बहिण योजना (महाराष्ट्र) और मंईयां सम्मान योजना (झारखंड) ने महिलाओं को सीधे आर्थिक मदद प्रदान की।
  • प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घरों में नाम होने से महिलाओं में सामाजिक सुरक्षा और सशक्तिकरण की भावना बढ़ी।
  • स्वच्छ भारत अभियान और हर घर जल योजना जैसी योजनाओं ने महिलाओं की रोजमर्रा की चुनौतियां कम की, जिससे मतदान में उनकी भागीदारी बढ़ी।
  • स्वयं सहायता समूह और मुद्रा योजना के तहत आसान लोन मिलने से लाखों महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हुईं।

विशेषकर बिहार में मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत महिलाओं को 10,000 रुपये से लेकर 2 लाख रुपये तक की सहायता राशि दी गई। इसका असर यह हुआ कि बिहार में महिला मतदान 71.6% तक पहुंच गया, जबकि पुरुषों का प्रतिशत 62.8% ही रहा।

जेंडर पॉलिटिक्स का उदय

2024 के चुनावों ने साफ कर दिया कि भारतीय लोकतंत्र अब जाति या धर्म आधारित समीकरणों पर ही नहीं, बल्कि जेंडर पॉलिटिक्स पर भी आधारित होने लगा है। महिलाएं अब स्वतंत्र वोट बैंक बन चुकी हैं। वे राजनीतिक दलों का चुनाव अपनी सुरक्षा, सम्मान और आर्थिक सशक्तिकरण के आधार पर करती हैं।

महिला केंद्रित नीतियां

महिला वोटिंग में बढ़ोतरी ने राजनीतिक दलों को यह संदेश दिया है कि अब घोषणापत्र और नीतियां महिलाओं को ध्यान में रखकर ही बनाई जाएंगी। इसका ताजा उदाहरण महिला आरक्षण बिल है, जिसमें संसद में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रावधान किया गया है। सरकार की महिला-केंद्रित योजनाओं ने न केवल महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त किया है, बल्कि उन्हें लोकतंत्र की सबसे मजबूत और निर्णायक आवाज भी बना दिया है।