26 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Rohith Vemula: दलित नहीं था रोहित वेमुला, तेलंगाना पुलिस का बड़ा खुलासा, आरोपी बरी

छात्र रोहित वेमुला मौत मामले में तेलंगाना पुलिस ने बड़ा खुलासा करते हुए बताया है कि वह दलित नहीं था। हाई कोर्ट ने इस केस के आरोपियों को बरी कर दिया है।

2 min read
Google source verification

छात्र रोहित वेमुला की मौत के मामले में तेलंगाना पुलिस ने एक क्लोजर रिपोर्ट दायर की है, जिसमें कहा गया है कि वह दलित नहीं था और उसने आत्महत्या कर ली क्योंकि उसे डर था कि उसकी असली जाति की पहचान उजागर हो जाएगी। मृतक छात्र के भाई राजा ने मीडिया को दिए एक बयान में इस दावे को बेतुका बताया और कहा, "मुझे नहीं पता कि मैं अपनी भावनाओं को कैसे व्यक्त करूं।" बता दें कि जनवरी 2016 में हैदराबाद विश्वविद्यालय के छात्र रोहित वेमुला की आत्महत्या के कारण विश्वविद्यालयों में दलितों के प्रति भेदभाव के खिलाफ देश भर में जमकर विरोध प्रदर्शन हुआ था। अब इस केस को लेकर तेलंगाना हाईकोर्ट को सौंपी गई एक रिपोर्ट में, पुलिस ने कहा कि रोहित वेमुला दलित नहीं था और उसे डर था कि उसकी असली जाति उजागर हो जाएगी।

आरोपी बरी

मामले की जांच कर रही पुलिस ने उन आरोपियों को भी बरी कर दिया, जिनमें बंडारू दत्तात्रेय, एन. रामचंदर राव, हैदराबाद विश्वविद्यालय के वीसी अप्पा राव, केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और एबीवीपी के नेता शामिल थे। पुलिस ने क्लोजर रिपोर्ट में बताया कि वेमुला परिवार का जाति प्रमाणपत्र जाली था और सबूतों के अभाव में केस बंद कर दिया गया। उच्च न्यायालय ने वेमुला के परिवार को निचली अदालत में अपील करने का निर्देश दिया।

बता दें कि रोहित के भाई राजा वेमुला परिवार 4 मई को तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी से मिलने के लिए हैदराबाद जाएगा। कोर्ट में रोहित के परिवार की ओर से पेश हुए अधिवक्ता ने कहा कि कलेक्टर ने मामले का फैसला अभी तक पूरा नहीं किया है।

रोहित वेमुला मौत मामले पर बीजेपी प्रवक्ता रचना रेड्डी ने कहा, "तेलंगाना के गृह विभाग ने 2016 के विवादास्पद रोहित वेमुला आत्महत्या और आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में एक क्लोजर रिपोर्ट प्रस्तुत की है। दलित छात्र रोहित वेमुला को प्रबंधन द्वारा आत्महत्या के लिए उकसाए जाने के विरोध में हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी में जमकर हंगामा हुआ। जांच में प्रमुख नेताओं समेत भाजपा नेताओं को आरोपित किया गया था। हालांकि पुलिस ने मार्च में एक विस्तृत क्लोजर रिपोर्ट दायर की जिसमें बताया गया कि एससी-एसटी अत्याचार अधिनियम(एससी और एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम) का कोई उल्लंघन नहीं देखा गया। रोहित वेमुला की आत्महत्या दुर्भाग्यपूर्ण थी लेकिन रिपोर्ट में कहा गया है कि आत्महत्या के लिए उकसाने का कोई सक्रिय मामला सामने नहीं आया है और जांच बंद कर दी गई है।''