
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि विश्व सत्य नहीं, शक्ति सुनता है। जिनमें शक्ति होती है, उनकी बात वैश्विक स्तर पर सुनी जाती है। फिर यह नहीं देखा जाता कि वह सही है या गलत। यदि कोई सत्य भी बोल रहा है, लेकिन वह दुर्बल है, तो उसकी बात नहीं सुनी जाती।
भागवत ने यह बात शुक्रवार को भोपाल में युवा संवाद कार्यक्रम में युवाओं के प्रश्नों के उत्तर देते हुए कही। उन्होंने कहा कि हमारे मत, पंथ, संप्रदाय, भाषा और जाति अलग हो सकते हैं, लेकिन हिंदू पहचान हम सभी को जोड़ती है। हम सबकी संस्कृति और धर्म एक है तथा हमारे पूर्वज समान हैं।
उन्होंने कहा कि हिंदू का मतलब संस्कार और स्वभाव है। यदि आप स्वयं को हिंदू कहते हैं, तो सबसे पहले अनुशासित होना आवश्यक है। उन्होंने हिन्दू कितने प्रकार की व्याख्या करते हुए कहा कि जब-जब हम यह भूलते हैं कि हम हिंदू हैं, तब-तब विपत्ति आती है। इसलिए हिंदुओं को जगाना और संगठित करना जरूरी है।
उन्होंने संघ के बारे में कहा कि यदि आप संघ और भाजपा को एक मानते हैं, तो यह बड़ी भूल है। दोनों बिल्कुल अलग हैं। संघ किसी की प्रतिक्रिया में शुरू हुआ संगठन नहीं है। संघ की किसी से प्रतिस्पर्धा भी नहीं है। भागवत बोले कि दुनिया के कई देश पूछते हैं कि युवा शक्ति कैसे तैयार की जाती है। हम कहते हैं कि इसका कोई अलग तरीका नहीं है। सशक्त युवा केवल शाखाओं में ही तैयार होते हैं, दूसरा कोई तरीका नहीं।
Updated on:
03 Jan 2026 01:31 am
Published on:
03 Jan 2026 01:31 am
