18 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

देश में जातीय भेदभाव मिटाने के लिए RSS का प्लान तैयार, हिंदू एकता के लिए शुरू होगा बड़ा अभियान

RSS Plan to End Caste Discrimination: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने वैभवशाली भारत बनाने की दिशा में देश भर के स्वयंसेवकों से काम करने की अपील की है। संघ के 100 साल पूरे होने के उपलक्ष में समरसता अभियान को नए रूप से लंच करने की तैयारी चल रही है। जातीय भेदभाव को खत्म करने के लिए संघ ने बड़ा प्लान तैयार किया है, जिस पर जल्द ही अमल होना शुरू होगा।

2 min read
Google source verification
rss.jpg

RSS Plan to End Caste Discrimination: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की स्थापना के 100 वर्ष 2025 में पूरें हो रहे हैं। 1925 में नागपुर में संघ की स्थापना हुई थी। पिछले वर्ष विजयदशमी के अवसर पर संघ द्वारा एक साथ कई अभियान लॉन्च करने की घोषणा की गई थी। इन्हीं में से एक निर्णय यह हुआ था कि देश से जातीय भेदभाव को जड़ से मिटाना है। संघ के स्वयंसेवक को अति शीघ्र इसे सफल बनाने में जुटने के लिए कहा गया था। उस बैठक के एजेंडे के बारे में सर सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोयल ने पत्रकारों को जानकारी दी थी कि समन्वयक बैठक में सामाजिक समरसता अभियान को और तेज करने का निर्णय लिया गया है, जिससे समाज में छोटे और बड़े का भेद आया। जबकि परमात्मा और संविधान सबके लिए एक है।

हिंदू एकता सबसे पहले

संघ द्वारा बताया गया की इस समय समाज की कुछ बड़ी समस्याओं के लिए तुरंत विशेष रूप से ध्यान देकर सामाजिक परिवर्तन के काम भी शुरू किए गए हैं। धर्मजागरण विभाग के माध्यम से हिन्दू समाज को कन्वर्ट करने के चल रहे कुंठित योजनाबद्ध प्रयासों को विफल करना तथा वे कनवर्टेड लोग जो फिर से अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ना चाहते हैं, उनके लिए मार्ग आसान करने का काम हुआ।

केंद्सर रकार पर निर्भर न रहते हुए अपने गांव का विकास सभी ग्रामवासी मिलकर करेंगे, सरकारी योजनाओं का आवश्यक उपयोग करते हुए ग्राम का सर्वांगीण विकास हम सब मिलकर करेंगे, इस उद्देश्य से ग्राम-विकास का कार्य आरम्भ हुआ।

हमारा हिन्दू समाज विभिन्न जातियों के नाम से जाना जाता रहा है। परन्तु जातीय विद्वेष बढ़ाकर जातिभेदों में समाज को बांटने का काम भी कुछ धर्म विरोधी लोग करते रहे हैं। सामाजिक सद्भाव बैठकों के माध्यम से सभी ने एकत्र बैठ कर कुछ सांझी समस्याओं और चुनौतियों के बारे में विचार करना तथा उससे उबरने के सामूहिक प्रयास करने की दृष्टि से सामाजिक सद्भाव बैठकों की श्रृंखला शुरू हुई।

हमारे ही समाज के कुछ वर्ग को अछूत कहकर शिक्षा, सुविधा और सम्मान से दुर्भाग्य से वंचित रखा गया। यह सरासर अन्यायपूर्ण था। इस अन्याय को दूर कर अपनी सांझी विरासत को याद कराते हुए सब को साथ लेकर आगे बढ़ने के प्रयास सामाजिक समरसता के माध्यम से आरम्भ हुए। यानी संघ जातियों में बंट चुके समाज को एक करने का अभियान अब तेज करने वाली है और इसकी शुरुआत वो बहुत ही जल्द करेंगे।

यह भी पढ़ें: सिद्दारमैया के शपथ ग्रहण से पहले विपक्षी एकता में दरार, ममता बनर्जी ने समारोह से किया किनारा
समर्थवान लोगों से आगे आने की अपील की

संघ के समन्वय बैठक में सामाजिक समरसता अभियान को और तेज करने का निर्णय लिया गया। उन्होंने कहा कि कुछ ऐतिहासिक कारण रहे, जिससे समाज में छोटे और बड़े का भेद आया, जबकि परमात्मा और संविधान के सामने सभी समान है। कहने का अर्थ यह है की जब उपर वाले हमरे साथ कभी भेद भाव नहीं करते तो हम इस तरह का पाप क्यों कर रहे हैं।

हम सभी के महापुरुष और सभी के पर्व-त्योहार एक जैसे हैं। जातीय भेदभाव समाप्त करने के लिए सामाजिक समरसता की गतिविधियां और तेज होंगी। आरएसएस ने इसके लिए समाज के समर्थवान लोगों से आगे आने की अपील की है। 100 वर्ष पूरे होने तक संघ के स्वयंसेवक पूरे तन मन धन से इस लक्ष्य को प्राप्त करने में जुटे हैं। इसमें वो कितना सफल हो पाते हैं यह देखना दिलचस्प होगा।

यह भी पढ़ें: इनकी अधूरी कहानी: डीके शिवकुमार जैसे कांग्रेस के वो दिग्गज जो मुख्मंत्री बनते-बनते रह गए