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Manipur Violence: SC का आदेश, ‘मणिपुर के DGP कोर्ट में हाजिर हों’, 6 प्वाइंट्स पर सरकार से मांगा जवाब

SC on Manipur Violence: मणिपुर में जारी हिंसा पर सुनवाई करते हुए SC ने कहा राज्य में मई से जुलाई तक कानून-व्यवस्था ठप हो गई थी। कोर्ट ने अगली सुनवाई की तिथि 7 अगस्त के लिए तय की और मणिपुर के पुलिस महानिदेशक (DGP) को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होकर सवालों के जवाब देने को कहा है।

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Manipur Video Case पर  CJI चंद्रचूड़ बोले- यह इकलौती घटना नहीं है, सुनवाई के दौरान मांगा हिसाब

Manipur Video Case पर CJI चंद्रचूड़ बोले- यह इकलौती घटना नहीं है, सुनवाई के दौरान मांगा हिसाब

SC on Manipur Violence: मणिपुर में दो समुदाय के बीच भड़की हिंसा को लेकर मंगलवार को भी SC में सुनवाई हुई। अदालत ने आज की सुनवाई के दौरान राज्य में जातीय हिंसा से संबंधित मणिपुर पुलिस की जांच को "बेहद सुस्त" बताया और तल्ख लहजे में कहा कि "राज्य की कानून-व्यवस्था और मशीनरी पूरी तरह से ध्वस्त हो गई है"। कोर्ट यह जानकर हैरान था कि लगभग तीन महीने तक FIR दर्ज नहीं की गई थी और हिंसा पर दर्ज 6000 एफआईआर में से अब तक केवल खानापूर्ति के लिए कुछ गिरफ्तारियां हुई हैं। कोर्ट ने मणिपुर के पुलिस महानिदेशक (DGP) को शुक्रवार दोपहर 2 बजे व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होने का निर्देश दिया। मुख्य न्यायाधीश ने सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के पूर्व जजों को कमेटी बनाने की बात कही। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने कहा कि 'हम ये भी देखेंगे कि CBI को कौन-कौन से मुकदमे-FIR जांच के लिए सौंपे जाएं। सरकार इस समस्या का समाधान निकाल कर ही अदालत ने आये।


CBI जांच कराने को लेकर CJI क्या बोले

मणिपुर ने चल रही हिंसा को लेकर SC में हुई सुनवाई के वक्त कई फैक्ट्स रखे गए। साथ में अदालत की ओर से इस मामले की गंभीरता को देखते हुए कई सवाल भी किये गए। CJI ने कहा कि, 'हमें CBI से जानना होगा कि CBI के बुनियादी ढांचे की सीमा क्या है, साथी ही क्या वह ये जांच कर सकती है।


सरकार ने शुक्रवार तक का मांगा समय

सरकार का पक्ष रख रहे सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि हमें इस मामले में शुक्रवार तक का समय दिया जाए। कल सोमवार को ही सुनवाई हुई थी। हमें राज्य के अधिकारियों से विमर्श करने का समय भी नहीं मिल पाया। इस दौरान अटॉर्नी जनरल वेंकटरमनी ने कहा कि अभी भी राज्य की स्थिति गंभीर हीं है। अदालत में दूसरे पक्ष की ओर से दी गई दलील का भी असर पड़ेगा। मेहता ने कहा कि महिलाओं से अपराध के 11 मामले सीबीआई को सौंप दिए जाएं। बाकी का क्लासिफिकेशन भी हम अदालत को उपलब्ध करवा देंगे। आगे के निर्णय भी उसी आधार पर लिए जाएं।

CJI ने आदेश लिखवाते हुए कहा कि हमें इस बात की जानकारी भी चाहिए कि CBI का इंफ्रास्ट्रक्चर कितना है साथी ही क्या वह ये जांच कर सकती है। हमें बताया गया है कि कुल 6496 FIR दर्ज है। हिंसा जब 3 मई को शुरू हुई उसके दो दिन बाद 5 मई तक 150 मौतें हुईं। इसके बाद भी हिंसा थमी नहीं। 250 लोग गिरफ्तार हुए, 1200 से अधिक हिरासत में लिए गए।

मणिपुर के पुलिस महानिदेशक (DGP) को सशरीर अदालत में उपस्थित होने का आदेश

CJI ने कहा कि सॉलिसीटर जनरल ने कहा है कि अब तक CBI को सौंपी गई दो FIR के अलावा भी 11 को राज्य सरकार सीबीआई को सौंपना चाहती है। अभी तक की मणिपुर हिंसा मामले में पुलिस की कार्रवाई धीमी और अपर्याप्त रही है। हम निर्देश देते हैं कि राज्य के पुलिस महानिदेशक व्यक्तिगत रूप से पेश होकर अदालत के प्रश्नों का जवाब दें और सभी मामलों का वर्गीकरण कर अदालत में चार्ट जमा करवाया जाए।

जानिए वो 6 बिंदु जिस पर अदालत चाहती है विस्तृत रिपोर्ट

इसके साथ ही अगली सुनवाई में कोर्ट ने मणिपुर DGP को कोर्ट में तलब किया है। कोर्ट उनसे हिंसा को लेकर सीधे सवाल पूछेगी। FIR के विभाजन, FIR दर्ज करने, बयान दर्ज करने, गिरफ्तारी आदि की जानकारी ली जाएगी। CJI ने कहा कि हमें पूरे और विस्तृत आंकड़ों वाला एक नोट तैयार करके अगली तारीख पर कोर्ट को बताएं, जिसमें ये सभी जानकारी मौजूद हो। इसके लिए कोर्ट ने रिपोर्ट के 6 बिंदु भी अपनी तरफ से बताए हैं।

पहला घटना की तारीख, दूसरा जीरो FIR दर्ज करने की तारीख, तीसरा नियमित FIR दर्ज करने की तारीख, चौथा वह तारीख जिस दिन गवाहों के बयान दर्ज किए गए हैं, पांचवा किस दिन crpc की धारा 164 के तहत कोर्ट के सामने बयान दर्ज किये गये और छठा गिरफ़्तारी की तारीख।