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चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति में अब नेता प्रतिपक्ष की भी होगी बड़ी भूमिका, सुप्रीम कोर्ट ने दिया बड़ा आदेश

Supreme Court on CEC Appointment: गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयुक्त की नियुक्ति पर बड़ा फैसला दिया है। सर्वोच्च अदालत ने चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के लिए एक समिति गठित करने का आदेश दिया है। जिसमें प्रधानमंत्री के साथ-साथ नेता प्रतिपक्ष और भारत के मुख्य न्यायधीश होंगे।

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SC Says CEC Appointment done by President on Recommendation of Committee of PM, LOP and CJI

Supreme Court on CEC Appointment: अडानी ग्रुप पर लगे आरोपों की जांच के लिए छह सदस्यीय कमेटी गठन के साथ-साथ गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने एक और बड़ा फैसला दिया। सुप्रीम कोर्ट का दूसरा फैसला भारतीय निवार्चन आयोग से जुड़ा है। दरअसल गुरुवार को सर्वोच्च न्यायालय ने चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के संबंध में एक बड़ा आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयुक्त की नियुक्ति सीबीआई प्रमुख के तर्ज पर हो। जिस तरह सीबीआई प्रमुख की नियुक्ति एक कमेटी की अनुशंसा पर होती है, वैसे ही चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के लिए भी सुप्रीम कोर्ट ने एक कमेटी बनाने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में चुनाव आयुक्तों के चयन के लिए प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता (एलओपी) व भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) की एक समिति का गठन करने का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से चुनाव आयोग के काम और चुनाव आयुक्त की नियुक्ति की प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी होगी।


कानून नहीं बनाने तक कायम रहेगी समिति-

न्यायमूर्ति के.एम. जोसफ की अध्यक्षता वाली पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने कहा कि यह समिति तब तक रहेगी जब तक संसद इस संबंध में कानून नहीं बना देती। शीर्ष अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि चुनाव आयोग को कार्यपालिका से स्वतंत्र रहना होगा। एक कमजोर चुनाव आयोग के परिणामस्वरूप कपटपूर्ण स्थिति पैदा होगी और आयोग की कुशलता प्रभावित होगी।


लोकतंत्र लोगों की शक्ति से जुड़ा मामलाः सुप्रीम कोर्ट-

शीर्ष अदालत का फैसला चुनाव आयोग के सदस्यों की नियुक्ति की प्रक्रिया में सुधार की सिफारिश करने वाली याचिकाओं की सुनवाई करते हुए आया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि चुनाव आयोग निष्पक्ष और कानूनी तरीके से कार्य करने और संविधान के प्रावधानों का पालन करने के लिए बाध्य है। पीठ ने कहा कि लोकतंत्र लोगों की शक्ति के साथ जुड़ा हुआ है और एक आम आदमी के हाथों में शांतिपूर्ण बदलाव की सुविधा प्रदान करता है।


सरकार के दवाब में काम करने का लगता रहता है आरोप-


बताते चले कि कई बार चुनाव के समय विपक्षी दल यह आरोप लगाते हैं कि चुनाव आयोग सरकार के दवाब में काम कर रही है। चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव के बाद विपक्षी दलों द्वारा आरोप लगाने की इस चलन में कमी आएगी। क्योंकि चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया नेता प्रतिपक्ष भी खुद शामिल होंगे।


अरुण गोयल की नियुक्ति के समय बढ़ा था विवाद-

चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के संबंध में याचिकाकर्ता अनूप बरांवल ने अपनी याचिका में चुनाव आयुक्त और मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति में भी कॉलेजियम सिस्टम को लागू करने की मांग की थी। 23 अक्टूबर 2018 को इस मामले को 5 जजों की संवैधानिक बेंच के पास भेज दिया गया था। आपको बता दें कि बीते साल 19 नवंबर को केंद्र सरकार ने पंजाब कैडर के IAS अफसर अरुण गोयल को चुनाव आयुक्त के तौर पर नियुक्त किया था। इसके बाद विवाद बढ़ गया था।

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