
शशि थरूर (Photo-X)
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि उन्होंने संसद में कभी भी पार्टी की घोषित लाइन का उल्लंघन नहीं किया।
उन्होंने कहा कि सिद्धांत के स्तर पर उनका एकमात्र सार्वजनिक मतभेद ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर रहा, जिस पर वह आज भी 'बिना किसी खेद' के कायम हैं।
केरल साहित्य महोत्सव में सवालों के जवाब देते हुए थरूर ने बताया कि पहलगाम घटना के बाद उन्होंने एक अखबार में लेख लिखकर सख्त लेकिन सीमित कार्रवाई की वकालत की थी, ताकि केवल आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया जा सके।
थरूर ने कहा कि भारत विकास पर केंद्रित देश है और उसे पाकिस्तान के साथ लंबे और व्यापक संघर्ष में नहीं फंसना चाहिए। उनके अनुसार, हैरानी की बात यह रही कि भारत सरकार ने वही कदम उठाए, जिनकी उन्होंने सिफारिश की थी।
पार्टी नेतृत्व से मतभेद की अटकलों पर उन्होंने दो टूक कहा कि जब भारत की सुरक्षा, संप्रभुता और वैश्विक प्रतिष्ठा दांव पर हो, तो भारत पहले आता है। उन्होंने जवाहरलाल नेहरू के कथन 'अगर भारत नहीं रहा तो कौन बचेगा' का हवाला देते हुए कहा कि राष्ट्रीय हित सर्वोपरि हैं, भले ही राजनीतिक दलों के बीच मतभेद क्यों न हों।
इस बीच, शशि थरूर के राज्य प्रदेश कांग्रेस समिति की अहम बैठक से गायब रहने पर केरल से दिल्ली तक राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। दावा किया जा रहा है कि कोच्चि में राहुल गांधी के कार्यक्रम में प्रोटोकॉल का पालन न होने से थरूर नाराज थे, इसी कारण उन्होंने बैठक में हिस्सा नहीं लिया।
इससे राज्य के कार्यकर्ताओं में कांग्रेस की एकता को लेकर संदेह भी उभरा। कोझिकोड पहुंचे थरूर ने केंद्रीय नेतृत्व से कथित विवाद पर सार्वजनिक टिप्पणी से इनकार करते हुए कहा कि ऐसी चिंताओं को पार्टी नेतृत्व तक सीधे पहुंचाना बेहतर है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने पहले ही पार्टी को कार्यक्रम में न आने की सूचना दे दी थी और एर्नाकुलम विवाद पर कुछ नहीं कहना चाहते।
वहीं, पार्टी मीटिंग में गैरमौजूदगी पर सियासी गलियारों में जो अंदरूनी मतभेद की अटकलें चल रही हैं, उस पर थरूर ने कहा कि ऐसी रिपोर्ट्स में सिर्फ आधी-अधूरी बातें थीं। उन्होंने कहा कि उनकी जो भी दिक्कतें हैं, उन पर पार्टी के अंदर बात की जाएगी।
कांग्रेस नेता ने माना कि उन्हें पार्टी में कुछ समस्याएं हैं और वह उन्हें पार्टी लीडरशिप के सामने उठाएंगे। उन्होंने साफ किया कि उन्होंने संसद में कभी भी पार्टी के बताए गए स्टैंड का उल्लंघन नहीं किया है और इस बात पर जोर दिया कि संगठन के अंदर विचारों में मतभेद को अंदर ही सुलझाया जाना चाहिए, न कि मीडिया के जरिए।
Published on:
25 Jan 2026 09:50 am

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