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BIS मानकों की बाध्यता के विरोध में उतरे जूता निर्माता

- अखिल भारतीय एमएसएमई फुटवियर कौन्सिल ने मनाया विरोध दिवस

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BIS  मानकों की बाध्यता के विरोध में उतरे जूता निर्माता

BIS मानकों की बाध्यता के विरोध में उतरे जूता निर्माता

नई दिल्ली। देश के फुटवियर निर्माता केंद्र सरकार के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्रालय के अधीन उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) की ओर से सभी प्रकार के जूतों पर भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के मानकों को लागू करने की अनिवार्यता के विरोध में उतर आए हैं।

फुटवियर निर्माताओं के संगठन अखिल भारतीय एमएसएमई फुटवियर कौन्सिल के आह्वान पर इस बाध्यता को अव्यवहारिक बताते हुए मंगलवार को तेरह राज्यों में विरोध दिवस मनाया गया। इसके तहत जूता उद्योगों के सामने प्रदर्शन किया गया।

कौन्सिल के राष्टीय चेयरमैन वीकेसी रज्जाक व संयोजक धर्मेन्द्र नरूला ने बताया कि बीआईएस गुणवत्ता मानक फुटवियर के विनिर्माण, उत्पादन प्रक्रिया, उपयोग किए जाने वाले कच्चे माल के प्रकार और फुटवियर उत्पादों की श्रेणियों पर विचार किए बिना तय किए गए हैं। गत 5 अगस्त को वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल की ओर से बुलाई गई बैठक में मंत्री ने बीआईएस मानकों को सरल व व्यावहारिक बनाने का आश्वासन दिया था। इनमें एक फैक्ट्री एक लाइसेंस, कम परीक्षण केवल तैयार माल पर, परीक्षणों में लम्बा अन्तराल, रासायनिक परीक्षणों की व्यवहारिता, 31 दिसम्बर से पहले तैयार स्टॉक बेचने का समय और री-साइकिल्ड सामग्री का उपयोग जैसे विकल्प लागू नहीं किए गए। इससे असमंजस की स्थिति बन रही है।

उन्होंने कहा कि हालांकि डीपीआईआईटी मानता है कि सूक्ष्म और लघु उद्योग इकाईयां बीआईएस मानदंडो के दायरे में नहीं आती हैं, लेकिन बीआईएस के परिपत्र इसे नहीं मानते। इसलिए फुटवियर उद्यमी केंद्र सरकार से बाध्यता मुक्ति के सम्बन्ध में एक निर्णायक आदेश की मांग कर रहे हैं।