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सिक्किम के नाथूला बॉर्डर इलाके में भारी बर्फबारी, हिमस्खलन से 6 की मौत, 22 पर्यटकों को बचाया

Avalanche at Nathula Road Sikkim: सिक्किम की राजधानी गंगटोक के विश्व प्रसिद्ध टूरिस्ट स्पॉट नाथूला दर्रे के पास मंगलवार को भीषण हिमस्खलन हुआ। इस हादसे में छह टूरिस्टों की मौत हो गई। जबकि 100 से ऊपर लोगों के अभी बर्फ में फंसे होने की आशंका जताई जा रही है।  

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Sikkim: 6 killed, over 80 feared trapped in avalanche on Nathula road

Avalanche at Nathula Road Sikkim: सिक्किम की राजधानी गंगटोक से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है। गंगटोक के वर्ल्ड फेमस टूरिस्ट स्पॉट नाथूला दर्रे के पास मंगलवार को दोपहर बाद भीषण हिमस्खलन (Avalanche) हुआ है। इस एवलांच में छह टूरिस्टों की मौत हो गई। जबकि 100 से ऊपर लोगों के अभी बर्फ में फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। हिमस्खलन की सूचना मिलने ही राहत-बचाव कार्य शुरू कर दिया गया है। बीआरओ के अधिकारी और जवान बर्फ में फंसे टूरिस्टों को निकालने की कोशिश में जुटे हैं। रेस्क्यू ऑपरेशन चला रहे बीआरओ के अधिकारियों ने बताया कि अभी तक 22 पर्यटकों को बचाया गया है। बर्फ में दबे अन्य लोगों को बचाने की कोशिश जारी है। घटनास्थल पर जारी रेस्क्यू ऑपरेशन की कई तस्वीरें और वीडियो भी सामने आए हैं। जिसे देखकर हिमस्खलन की भयावहता का सहज की अंदाजा लगाया जा सकता है।


मरने वालों में चार पुरुष, एक महिला और एक बच्चा शामिल-


गंगटोक को नाथूला से जोड़ने वाले जवाहरलाल नेहरू रोड के पास यह हादसा हुआ। इसमें 6 टूरिस्ट की मौत हो गई और 150 लोगों के बर्फ में फंसे होने की खबर है। मरने वालों में चार पुरुष, एक महिला और एक बच्चा शामिल है। यह घटना दोपहर करीब 12:20 बजे हुई। फिलहाल वहां रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।


जहां हादसा हुआ, वहां जाने की रहती है मनाही

पुलिस अधिकारियों के अनुसार जहां यह हादसा हुआ वहां जाने की मनाही रहती है। पुलिस वालों ने बताया कि वहां जाने के लिए पास जारी होता है। जहां से पास जारी होता है वहां से 13 मील तक आगे जाने की परमिशन रहती है। हालांकि सैलानी 15 मील तक चले गए थे।


क्या होता है हिमस्खलन, कैसे होती लोगों की मौत


बर्फ या पत्थर के पहाड़ की ढलान से तेजी से नीचे गिरने को हिमस्खलन या एवलांच कहते हैं। हिमस्खलन के दौरान, बर्फ, चट्टान, मिट्टी और अन्य चीजें किसी पहाड़ से नीचे की ओर तेजी से फिसलती हैं। इस दौरान लोग बर्फ या चट्टान के नीचे दब जाते हैं। जिससे उनकी मौत हो जाती है। इससे पहले उत्तरकाशी में भीषण हिमस्खलन हुआ था। जहां 27 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी।

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हिमस्खलन आमतौर पर तब शुरू होता है जब किसी पहाड़ की ढलान पर मौजूद बर्फ या पत्थर जैसी चीजें उसके आसपास से ढीली हो जाती हैं। इसके बाद ये तेजी से ढलान के नीचे मौजूद और चीजों को इकट्टा कर नीचे की और गिरने लगती हैं। इसका अंदाजा लगा पाना काफी मुश्किल होता है।

अब तक वैज्ञानिक ये भविष्यवाणी करने में सक्षम नहीं हैं कि हिमस्खलन कब और कहां होगा। वे बस बर्फ के ढेर, तापमान और हवा की कंडीशन से हिमस्खलन के खतरे का अनुमान लगा सकते हैं। बर्फ में स्कीइंग वाले कुछ इलाकों में एवलांच कंट्रोल टीमें तैनात होती हैं।