
सोमनाथ मंदिर (Photo- ANI)
Somnath Temple: सौराष्ट्र की शिवनगरी सोमनाथ स्वाभिमान के सुर, आस्था की अटूट लय और डमरू की ताल के साथ सज-धज कर तैयार है। यहां का हर चौक-चौराहा और हाई-वे तक महादेव के रंग में रंगा है। सतरंगी रोशनी से सराबोर इस शहर में दिवाली सा नजारा पेश आ रहा है। शुक्रवार रात को यहां साधु-संतों ने भव्य शोभायात्रा निकाली। समारोह में भाग लेने के लिए देश भर से सैकड़ों संत सोमनाथ पहुंच गए हैं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शनिवार शाम यहां पहुंचेंगे। इस दिन मोदी सोमनाथ मंदिर में दर्शन और पूजा अर्चना करेंगे और ओंकार मंत्र के जाप में भाग लेंगे। ड्रोन शो का अवलोकन भी करेंगे। इस शो में सोमनाथ के पूरे इतिहास को आकाश में उकेरा जाएगा। वहीं, रविवार को स्वाभिमान महापर्व पर विशाल जनसमूह को संबोधित करेंगे। पीएम मोदी सोमनाथ ट्रस्ट के अध्यक्ष भी हैं। गुजरात सरकार और केंद्र सरकार इस अवसर को केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की सभ्यतागत स्मृति के उत्सव के रूप में पेश कर रही हैं।
आक्रांता मोहम्मद गजनवी ने 1026 में सोमनाथ पर आक्रमण किया था। इस हमले के एक हजार वर्ष पूरे हो रहे हैं। वहीं 2026 में ही सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के भी 75 वर्ष पूरे हो रहे हैं। इसी उपलक्ष्य में यह ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ मनाया जा रहा है।
पीएम मोदी 11 जनवरी को सुबह 9:45 बजे भव्य शौर्य यात्रा का नेतृत्व करेंगे। इस यात्रा में 108 घोड़ों की प्रतीकात्मक शौर्य यात्रा निकाली जाएगी, यह वीरता और बलिदान का प्रतीक होगी। यह यात्रा सोमनाथ मंदिर की रक्षा करते हुए प्राणों की आहुति देने वाले अनगिनत योद्धाओं को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए आयोजित की जा रही है।
पीएम मोदी की सोमनाथ स्वाभिमान सभा के लिए यहां तीन विशाल डोम बनाए गए हैं। इसमें एक लाख से अधिक लोग भाग लेंगे। पुलिस और प्रशासन शुक्रवार को यहां तैयारियों में जुटे रहे। सुरक्षा व्यवस्था में डेढ़ हजार पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। यहां तापमान 28 डिग्री के आसपास है। ऐसे में डोम में 500 से अधिक पंखे लगाए गए हैं।
इतिहासकार नरोतमभाई पलाण ने बताया कि सोमनाथ का प्रथम मंदिर लगभग 2000 वर्ष पुराना है। शुरुआत के 1000 सालों तक यह मंदिर अत्यंत समृद्ध और अटूट रहा, जिसकी ख्याति सुनकर गजनवी ने आक्रमण किया था। जब-जब इस मंदिर को तोड़ा गया, तब-तब प्रजा और राजाओं ने मिलकर उसे फिर से खड़ा किया। मंदिर का मौजूदा स्वरूप आठवीं बार का पुनर्निर्माण है। मंदिर के नवनिर्माण के लिए पहला योगदान पोरबंदर ने दिया था। पोरबंदर के विख्यात शेठ नानजी कालिदास मेहता ने उस जमाने में मंदिर निर्माण के लिए 1 लाख रुपए का पहला दान दिया था।
Published on:
10 Jan 2026 03:01 am
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