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इंटरनेशनल साइबर धोखाधड़ी रैकेट का भंडाफोड़, 7 गिरफ्तार

Cyber Fraud Racket: श्रीनगर में CIK ने अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ कर 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। हाई-टेक कॉल सेंटर के जरिए फिशिंग और क्रिप्टो से करोड़ों की ठगी की जा रही थी।

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साइबर फ्रॉड रैकेट का भंडाफोड़ (IANS)

Cyber Fraud Gang Busted: जम्मू-कश्मीर पुलिस की काउंटर-इंटेलिजेंस कश्मीर (CIK) विंग ने गुरुवार को एक बड़ी कार्रवाई करते हुए श्रीनगर में सक्रिय एक इंटरनेशनल साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ किया। इस ऑपरेशन में सात संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि भारी मात्रा में डिजिटल और उपकरण जब्त किए गए हैं।

श्रीनगर में चल रहा था हाई-टेक साइबर फ्रॉड नेटवर्क

CIK द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, एजेंसी को ऐसे गुप्त कॉल सेंटरों की विश्वसनीय और तकनीकी जानकारी मिली थी, जो विदेशी और भारतीय नागरिकों को निशाना बनाकर ऑनलाइन ठगी को अंजाम दे रहे थे।

कई जगहों पर छापेमारी, 7 आरोपी गिरफ्तार

पुख्ता जानकारी मिलने के बाद CIK की टीमों ने श्रीनगर शहर के विभिन्न हिस्सों में एक साथ छापेमारी की। इस दौरान सात संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया और बड़ी संख्या में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए।

जब्त किए गए सामान में शामिल हैं -

  • 13 मोबाइल फोन (iPhone 17, iPhone 16, iPhone 11 सहित)
  • 9 लैपटॉप (Dell, HP और MacBook)
  • VoIP सिस्टम
  • सिम कार्ड और नेटवर्किंग डिवाइस
  • डिजिटल स्टोरेज मीडिया

ऐसे करते थे साइबर ठगी

जांच में सामने आया कि आरोपी VoIP (Voice over Internet Protocol) तकनीक का इस्तेमाल कर अवैध कॉल सेंटर चला रहे थे। ये लोग अंतरराष्ट्रीय वर्चुअल नंबर तैयार करते और सर्वर रूटिंग व स्पूफिंग तकनीकों के जरिए अपनी असली लोकेशन छिपा लेते थे। इसके बाद खुद को वैध सेवा प्रदाता बताकर विदेशी नागरिकों को कॉल करते थे। पीड़ितों को फंसाने के लिए फर्जी YahooMail वेबसाइट और गूगल विज्ञापनों का सहारा लिया जाता था।

फिशिंग विज्ञापनों से बनाते थे शिकार

गिरोह ऑनलाइन फिशिंग विज्ञापनों के जरिए लोगों को टारगेट करता था। जैसे ही कोई यूजर विज्ञापन पर क्लिक करता, उसकी स्क्रीन पर एक टोल-फ्री नंबर दिखाई देता था। यह नंबर सीधे आरोपियों के कॉल सेंटर से जुड़ा होता था, जहां उन्हें झांसे में लेकर बैंकिंग डिटेल्स और अन्य निजी जानकारी हासिल की जाती थी।

क्रिप्टोकरेंसी के जरिए होती थी मनी लॉन्ड्रिंग

ठगी से जुटाई गई रकम को अलग-अलग बैंक खातों, म्यूल अकाउंट्स और क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट (मुख्य रूप से USDT) में ट्रांसफर किया जाता था। इसके बाद पैसे को कई स्तरों पर घुमाकर उसकी असली पहचान छिपाई जाती थी। खास बात यह है कि इस पूरे नेटवर्क में नकद लेन-देन का इस्तेमाल नहीं किया गया, जिससे इसकी पूरी तरह डिजिटल और हाई-टेक प्रकृति सामने आती है।

करोड़ों रुपये की ठगी का शक

CIK के अनुसार, अब तक की जांच में करोड़ों रुपये के लेन-देन का अनुमान है। जब्त किए गए उपकरणों से कई अहम और आपत्तिजनक सबूत मिले हैं, जो इस गिरोह के बेहद संगठित और तकनीकी रूप से उन्नत होने की पुष्टि करते हैं। इस मामले में संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया गया है और आगे की जांच जारी है।