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Ajab: जिन लोगों ने ऊंची छत वाले कमरे में दी परीक्षा, उन्हें मिले कम अंक

Ajab : 15, 400 स्नातक विद्यार्थियों पर शोध में आए दिलचस्प नतीजे, जिन लोगों ने ऊंची छत वाले कमरे में परीक्षा दी, उन्हें कम अंक मिले।

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आमतौर पर पेपर का अच्छा या बुरा होना विषय की समझ और परीक्षार्थियों की तैयारी पर निर्भर करता है। लेकिन नए शोध में एक दिलचस्प बात सामने आई है, परीक्षा हॉल भी पेपर के प्रदर्शन पर असर डालता है। साउथ ऑस्ट्रेलिया यूनिवर्सिटी और डीकिन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने वर्ष 2011 से 2019 के बीच परीक्षा देने वाले 15 हजार 400 स्नातक विद्यार्थियों परीक्षा परिणामों की तुलना परीक्षा केंद्र की छत की ऊंचाई के आधार पर की। इसमें पता चला कि जिन लोगों ने ऊंची छत वाले कमरे में परीक्षा दी, उन्हें कम अंक मिले।

छत की ऊंचाई का प्रदर्शन से संबंध

हमारे जेहन में यह सवाल उठना लाजिमी है कि पेपर के प्रदर्शन से छत की ऊंचाई का क्या संबंध? अध्ययन का नेतृत्व करने वाली ईसाबेला बोवर ने बताया कि अध्ययन में यह बात निकलकर आई कि कमरे में कितने परीक्षार्थी थे, कमरे का तापमान और वायु गुणवत्ता का उतार-चढ़ाव क्या था? क्योंकि ये हमारे शरीर और मस्तिष्क को प्रभावित करता है और ये सब छत की ऊंचाई और कमरे के आकार पर निर्भर करता है।

ऐसे किया परीक्षण

बोवर ने प्रतिभागियों के मस्तिष्क की गतिविधियों को मापने के एि वर्चुअल रियलिटी टेस्ट भी किए, जो उनके द्वारा इस्तेमाल किए कमरों के प्रकार पर आधारित थे। स्कैलप पर इलेक्ट्रॉड लगाकर अलग-अलग आकार के कमरों में मस्तिष्क की प्रक्रिया को मापा। इसके साथ हृदय गति और सांस में बदलाव को भी समझा। शोधकर्ताओं ने पाया कि बड़े और ऊंचाई वाले कमरे में मस्तिष्क उसकी तरह काम करता है, जैसे किसी कठिन काम के लिए ध्यान केंद्रित करने वक्त करता है। बोवर के मुताबिक इस दिशा में अभी और भी शोध करने की आवश्यकता है, ताकि दुनियाभर में परीक्षा प्रणालियों में सुधार किया जा सके।