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ब्रेस्ट दबाने को रेप की कोशिश न मानने वाले फैसलों पर SC सख्त, अदालतों को दिए निर्देश

Supreme Court : यौन अपराधों की सुनवाई में न्यायिक संवेदनशीलता सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी (एनजेए) की विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट को मंजूरी देते हुए इसे सुप्रीम कोर्ट, सभी हाईकोर्ट और जिला अदालतों की वेबसाइटों पर अपलोड करने का निर्देश दिया है।
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भारत

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kamlesh sharma

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Updated: 15 Jul 2026, 12:04 PM IST

Supreme Court facial recognition.

सुप्रीम कोर्ट (फोटो-ANI)

Supreme Court News : नई दिल्ली। यौन अपराधों की सुनवाई में न्यायिक संवेदनशीलता सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय न्यायिक अकादमी (एनजेए) की विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट को मंजूरी देते हुए इसे सुप्रीम कोर्ट, सभी हाईकोर्ट और जिला अदालतों की वेबसाइटों पर अपलोड करने का निर्देश दिया है। सीजेआइ सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने कहा कि सभी अदालतें इन दिशा-निर्देशों का पालन करें।

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा गुप्ता ने पटना हाईकोर्ट के हालिया आदेश का उल्लेख किया, जिसमें महिला की सलवार उतारने की कोशिश और छाती दबाने को बलात्कार के प्रयास का मामला नहीं माना गया। उन्होंने कहा कि यह फैसला इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस विवादित आदेश जैसा है, जिसमें नाबालिग का पायजामे का नाड़ा खोलने, छाती पकड़ने और पुलिया के नीचे खींचने की कोशिश को भी बलात्कार के प्रयास की श्रेणी से बाहर माना गया था। सुप्रीम कोर्ट फरवरी में इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला रद्द कर चुका है। सीजेआइ ने कहा कि नवीनतम निर्णयों का अध्ययन करना भी न्यायाधीशों का दायित्व है। अदालत ने स्पष्ट किया कि वह पटना हाईकोर्ट के फैसले पर भी विस्तृत आदेश पारित करेगी।

एनजेए की रिपोर्ट में विस्तृत दिशा-निर्देश दिए

एनजेए की विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट में यौन अपराधों से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान न्यायिक संवेदनशीलता, पीड़ित-केंद्रित भाषा और गरिमापूर्ण न्यायिक दृष्टिकोण अपनाने के विस्तृत दिशा-निर्देश दिए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सभी अदालतों को इनका पालन करने का निर्देश दिया है। राज्यों से कहा गया है कि पुलिस एफआइआर दर्ज करने और आरोपपत्र दाखिल करने में भी इन्हें अपनाए। रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट, सभी हाईकोर्ट, जिला अदालतों, राष्ट्रीय व राज्य न्यायिक अकादमियों तथा विधि विश्वविद्यालयों में भी उपलब्ध कराई जाएगी।

पटना हाईकोर्ट ने क्या कहा था

पटना हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि किसी महिला की सलवार उतारना और उसकी छाती दबाना रेप की कोशिश साबित करने के लिए काफी नहीं है। कोर्ट ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति महिला की सलवार उतारता है और उसकी छाती दबाता है तो ये हरकतें महिला की मर्यादा भंग करने का अपराध मानी जाएंगी न कि रेप की कोशिश। पटना हाई कोर्ट ने रेप की कोशिश के मामले में एक व्यक्ति की सजा को रद करते हुए यह टिप्पणी की।

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