
सुप्रीम कोर्ट में चार जज बढ़ा देने के बावजूद अभी जजों की संख्या जरूरत से काफी कम है। (Infograph Design Source: AI)
भारत के सुप्रीम कोर्ट में अब 38 जज होंगे। इससे पहले 34 थे। राष्ट्रपति ने इनकी संख्या 38 किए जाने वाले विधेयक को मंजूरी दे दी है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में चार नए जज नियुक्त किए जाने का रास्ता साफ हो गया है। कानून मंत्री अर्जुन मेघवाल के मुताबिक मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्य कांत ने 11 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जजों की संख्या बढ़ाने का अनुरोध किया था। इसके बाद सरकार ने पहले 17 मई को अध्यादेश जारी किया और बाद में इस संबंध में विधेयक पारित करवाया, जिसे अब राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई है।
| वर्ष | सुप्रीम कोर्ट में स्वीकृत न्यायाधीशों की संख्या |
| 1950 | 8 |
| 1956 | 11 |
| 1960 | 14 |
| 1978 | 18 |
| 1986 | 26 |
| 2009 | 31 |
| 2019 | 34 |
| 2026 | 38 |
सुप्रीम कोर्ट में भले ही चार जज ज्यादा होंगे, लेकिन दुनिया के कई बड़े देशों की तुलना में अभी भी नागरिकों और जजों का अनुपात बेहद कम है। 2025 में प्रति दस लाख की आबादी पर जजों का अनुपात 15.4 था। 2021 में यह 21 हुआ करता था, 2019 में यह 15.3 और 2020 में 14.8 था। विधि आयोग ने अपनी 120वीं रिपोर्ट में सिफ़ारिश की थी कि यह अनुपात कम से कम 50 होना चाहिए। यह बात 1987 की है। करीब 40 साल बाद भी हम 15 के आसपास ही हैं। नीचे दिए टेबल पर नजर डालें तो पता चलता है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तो हम कहीं नहीं ठहरते।
| देश | न्यायाधीश-जनसंख्या अनुपात (प्रति 10 लाख) |
| फ्रांस (France) | 418.7 |
| ब्रिटेन (UK) | 286.9 |
| जर्मनी (Germany) | 249.8 |
| चीन (China) | 241.8 |
| रूस (Russia) | 184.5 |
| इटली (Italy) | 119.3 |
| अमेरिका (US) | 104.6 |
| ब्राजील (Brazil) | 84.9 |
| जापान (Japan) | 30.9 |
| भारत (India) | 15.1 |
राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड (National Judicial Data Grid, NJDG) के अगस्त 2026 के आंकड़े बताते हैं कि सुप्रीम कोर्ट में 95316 मुकदमे लंबित हैं। दिसंबर 2024 में इनकी संख्या 83000 और 1950 में 690 थी।
| वर्ष | कुल न्यायाधीश | न्यायाधीश और लंबित मामलों का अनुपात (प्रति 10 लाख) | न्यायाधीश और जनसंख्या का अनुपात (प्रति 10 लाख) | रिक्ति दर (%) |
| 2019 | 20,573 | 555.4 | 15.3 | 27.5 |
| 2020 | 20,041 | 473.5 | 14.8 | 26.5 |
| 2021 | 20,068 | 427.1 | 14.7 | 27.8 |
| 2022 | 20,117 | 407.6 | 14.5 | 30.3 |
| 2023 | 20,835 | 407.1 | 14.9 | 27.6 |
| 2024 | 21,269 | 405.0 | 15.1 | 26.4 |
| 2025 | 21,841 | 403.4 | 15.4 | 23.8 |
भारत में न्यायपालिका पर राज्यों के खर्च के मामले में भी बड़ी असमानता दिखाई देती है। इंडियन जस्टिस रिपोर्ट 2025 में राज्यों में न्यायपालिका पर प्रति व्यक्ति खर्च के हिसाब से उनकी जो रैंकिंग की गई है, उससे यह अंतर देखा जा सकता है। दस में से दस अंक पाने वाला इकलौता राज्य पंजाब ही है।17 में से दस राज्यों को 5 से कम अंक मिले हैं। 17 राज्यों का हाल आप इस टेबल में देख सकते हैं:
| रैंक (Rank) | राज्य (State) | स्कोर (Score out of 10) |
| 2 | पंजाब | 10.00 |
| 1 | हरियाणा | 9.79 |
| 3 | केरल | 8.88 |
| 5 | उत्तराखंड | 7.11 |
| 6 | महाराष्ट्र | 6.53 |
| 8 | तेलंगाना | 6.11 |
| 7 | तमिलनाडु | 5.19 |
| 4 | कर्नाटक | 4.79 |
| 9 | राजस्थान | 4.57 |
| 10 | आंध्र प्रदेश | 4.19 |
| 13 | ओडिशा | 4.09 |
| 11 | गुजरात | 3.81 |
| 12 | मध्य प्रदेश | 3.11 |
| 14 | झारखंड | 2.95 |
| 16 | छत्तीसगढ़ | 2.26 |
| 15 | उत्तर प्रदेश | 1.88 |
| 17 | बिहार | 1.00 |
Updated on:
12 Aug 2026 03:17 pm
Published on:
12 Aug 2026 03:17 pm
