13 अगस्त 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

दस लाख लोगों पर महज 15 जज! 40 साल पहले विधि आयोग ने कहा था 50 चाहिए, सुप्रीम कोर्ट में 8 से 38 होने में लगे 76 साल

2019 के बाद सुप्रीम कोर्ट में पहली बार जजों की संख्या बढ़ाई गई है, लेकिन चार जज बढ़ा देना ऊंट के मुंह में जीरा के बराबर नहीं है। यहां दिए आंकड़ों को समझें तो यह बात शीशे की तरह साफ हो जाएगी।
2 min read
Google source verification
Supreme Court Pending Cases, India Judiciary, Judicial Infrastructure, Judiciary Budget

सुप्रीम कोर्ट में चार जज बढ़ा देने के बावजूद अभी जजों की संख्या जरूरत से काफी कम है। (Infograph Design Source: AI)

भारत के सुप्रीम कोर्ट में अब 38 जज होंगे। इससे पहले 34 थे। राष्ट्रपति ने इनकी संख्या 38 किए जाने वाले विधेयक को मंजूरी दे दी है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में चार नए जज नियुक्त किए जाने का रास्ता साफ हो गया है। कानून मंत्री अर्जुन मेघवाल के मुताबिक मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्य कांत ने 11 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जजों की संख्या बढ़ाने का अनुरोध किया था। इसके बाद सरकार ने पहले 17 मई को अध्यादेश जारी किया और बाद में इस संबंध में विधेयक पारित करवाया, जिसे अब राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई है।

सुप्रीम कोर्ट में 8 से 38 जज होने में लगे 76 साल

वर्षसुप्रीम कोर्ट में स्वीकृत न्यायाधीशों की संख्या
19508
195611
196014
197818
198626
200931
201934
202638

भारत में 10 लाख की आबादी पर 15 जज, फ्रांस में 418

सुप्रीम कोर्ट में भले ही चार जज ज्यादा होंगे, लेकिन दुनिया के कई बड़े देशों की तुलना में अभी भी नागरिकों और जजों का अनुपात बेहद कम है। 2025 में प्रति दस लाख की आबादी पर जजों का अनुपात 15.4 था। 2021 में यह 21 हुआ करता था, 2019 में यह 15.3 और 2020 में 14.8 था। विधि आयोग ने अपनी 120वीं रिपोर्ट में सिफ़ारिश की थी कि यह अनुपात कम से कम 50 होना चाहिए। यह बात 1987 की है। करीब 40 साल बाद भी हम 15 के आसपास ही हैं। नीचे दिए टेबल पर नजर डालें तो पता चलता है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तो हम कहीं नहीं ठहरते।

देशन्यायाधीश-जनसंख्या अनुपात (प्रति 10 लाख)
फ्रांस (France)418.7
ब्रिटेन (UK)286.9
जर्मनी (Germany)249.8
चीन (China)241.8
रूस (Russia)184.5
इटली (Italy)119.3
अमेरिका (US)104.6
ब्राजील (Brazil)84.9
जापान (Japan)30.9
भारत (India)15.1

जज नहीं बढ़े तो बढ़ रहे लंबित मामले

राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड (National Judicial Data Grid, NJDG) के अगस्त 2026 के आंकड़े बताते हैं कि सुप्रीम कोर्ट में 95316 मुकदमे लंबित हैं। दिसंबर 2024 में इनकी संख्या 83000 और 1950 में 690 थी।

वर्षकुल न्यायाधीशन्यायाधीश और लंबित मामलों का अनुपात (प्रति 10 लाख)न्यायाधीश और जनसंख्या का अनुपात (प्रति 10 लाख)रिक्ति दर (%)
201920,573555.415.327.5
202020,041473.514.826.5
202120,068427.114.727.8
202220,117407.614.530.3
202320,835407.114.927.6
202421,269405.015.126.4
202521,841403.415.423.8

न्यायपालिका पर खर्च को अहमियत नहीं! मात्र एक राज्य को 10 में 10 नंबर

भारत में न्यायपालिका पर राज्यों के खर्च के मामले में भी बड़ी असमानता दिखाई देती है। इंडियन जस्टिस रिपोर्ट 2025 में राज्यों में न्यायपालिका पर प्रति व्यक्ति खर्च के हिसाब से उनकी जो रैंकिंग की गई है, उससे यह अंतर देखा जा सकता है। दस में से दस अंक पाने वाला इकलौता राज्य पंजाब ही है।17 में से दस राज्यों को 5 से कम अंक मिले हैं। 17 राज्यों का हाल आप इस टेबल में देख सकते हैं:

रैंक (Rank)राज्य (State)स्कोर (Score out of 10)
2पंजाब10.00
1हरियाणा9.79
3केरल8.88
5उत्तराखंड7.11
6महाराष्ट्र6.53
8तेलंगाना6.11
7तमिलनाडु5.19
4कर्नाटक4.79
9राजस्थान4.57
10आंध्र प्रदेश4.19
13ओडिशा4.09
11गुजरात3.81
12मध्य प्रदेश3.11
14झारखंड2.95
16छत्तीसगढ़2.26
15उत्तर प्रदेश1.88
17बिहार1.00

बड़ी खबरें

View All

राष्ट्रीय

ट्रेंडिंग