25 मई 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Supreme Court On Child Labour: डांस बार, स्पा और सैलून में बाल श्रम पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र सरकार को भेजा नोटिस

Child Labour in Dance Bars: डांस बार, स्पा, मसाज पार्लर और सैलून जैसे प्रतिष्ठानों में बाल श्रम को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने बच्चों के यौन शोषण और मानव तस्करी पर चिंता जताते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है।

2 min read
Google source verification

भारत

image

Rahul Yadav

May 26, 2026

Supreme Court On Child Labour

Supreme Court On Child Labour (Image: Official Website)

Supreme Court On Child Labour: डांस बार, ऑर्केस्ट्रा, नौटंकी, स्पा, मसाज पार्लर और सैलून जैसे प्रतिष्ठानों में बाल श्रम को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने इन क्षेत्रों में बच्चों के रोजगार और प्रदर्शन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग वाली जनहित याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल पांचोली की पीठ ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि बच्चों के शोषण और तस्करी से जुड़े मुद्दों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

बच्चों के शोषण और तस्करी पर चिंता

‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन एलायंस’ की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि डांस बार, स्पा, मसाज पार्लर और मनोरंजन से जुड़े कई प्रतिष्ठानों में बच्चों के यौन शोषण, मानव तस्करी और उत्पीड़न का खतरा बना रहता है। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एचएस फुल्का ने अदालत में दलील पेश की।

कानून में बदलाव की मांग

याचिका में केंद्र सरकार से बाल एवं किशोर श्रम (प्रतिषेध और विनियमन) अधिनियम, 1986 के तहत प्रतिबंधित व्यवसायों की सूची का विस्तार करने की मांग की गई है। इसके तहत 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के ऐसे प्रतिष्ठानों में काम करने और प्रदर्शन पर पूरी तरह रोक लगाने की मांग की गई है।

नियमन नहीं, पूर्ण प्रतिबंध जरूरी

याचिका में कहा गया है कि वर्तमान कानून में मसाज पार्लर, जिमनेजियम, मनोरंजन केंद्र और चिकित्सा सुविधाएं अनुसूची के भाग-बी में शामिल हैं, जहां केवल नियमन लागू होता है।

याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि इन्हें भाग-ए में स्थानांतरित किया जाए, ताकि इन जगहों पर बच्चों के रोजगार पर पूर्ण प्रतिबंध लागू हो सके।

रेस्क्यू और पुनर्वास की भी मांग

सुप्रीम कोर्ट में यह भी मांग की गई कि राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) को ऐसे मामलों में बच्चों के रेस्क्यू और पुनर्वास के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करने के निर्देश दिए जाएं।

अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। माना जा रहा है कि इस मामले पर आने वाले दिनों में व्यापक बहस हो सकती है।