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कचरा सिर्फ सफाईकर्मियों की जिम्मेदारी नहीं, हर नागरिक निभाए अपनी भूमिका: सुप्रीम कोर्ट

Supreme Court Waste Management: देश में बढ़ते कचरे के संकट पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा है कि सफाई सिर्फ नगर निगम या सफाईकर्मियों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक को अपनी भूमिका निभानी होगी। अदालत ने हर घर में कचरा अलग-अलग श्रेणियों में बांटने, अवैध डंपिंग रोकने और जिला स्तर पर निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।

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भारत

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Rahul Yadav

May 26, 2026

Supreme Court on Garbage

Supreme Court on Garbage (AI Image)

Supreme Court on Garbage: देश में बढ़ते कचरे के संकट पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा है कि कचरा प्रबंधन केवल नगर निकायों या सफाईकर्मियों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि हर नागरिक को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। अदालत ने साफ कहा कि अगर भारत को स्वच्छ और व्यवस्थित बनाना है तो लोगों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है।

भोपाल नगर निगम बनाम डॉ. सुभाष सी. पाण्डेय मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस पंकज मिथल और जस्टिस एस.वी.एन. भट्टी की खंडपीठ ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी पालन के लिए ‘सुप्रीम कोर्ट एम्पावर्ड मॉनिटरिंग कमेटी’ गठित करने के निर्देश दिए।

इस समिति में केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के प्रतिनिधि शामिल होंगे। समिति देशभर में कचरा प्रबंधन नियमों के पालन की निगरानी करेगी।

जिला कलेक्टरों को दिए विशेष अधिकार

सुप्रीम कोर्ट ने पहली बार जिला कलेक्टरों को विशेष अधिकार देते हुए अवैध कचरा परिवहन, खुले में डंपिंग और नियम उल्लंघन पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

कोर्ट ने कहा कि हर जिले में विशेष सेल बनाए जाएं, जो कचरा प्रबंधन व्यवस्था की निगरानी करें। साथ ही स्थानीय निकायों और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जवाबदेही भी तय की जाए।

रेलवे से भी मांगा जवाब

अदालत ने भारतीय रेलवे को भी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के दायरे में लाते हुए जवाब तलब किया है। इसके अलावा स्कूलों में कचरा प्रबंधन को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने की जरूरत पर भी जोर दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने सभी संबंधित एजेंसियों से 6 अगस्त तक अंतरिम रिपोर्ट मांगी है।

सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख निर्देश

  • हर घर में कचरे को चार श्रेणियों - गीला, सूखा, सेनिटरी और विशेष में अलग करना अनिवार्य होगा।
  • स्थानीय निकायों को घर-घर से अलग-अलग कचरा संग्रह सुनिश्चित करना होगा।
  • खुले में कचरा फेंकने और संवेदनशील डंपिंग पॉइंट खत्म करने के निर्देश दिए गए हैं।
  • बंद वाहनों के जरिए कचरा परिवहन सुनिश्चित करने को कहा गया है।

बढ़ते कचरे पर अदालत की चिंता

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देश में तेजी से बढ़ता कचरा पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य दोनों के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। अदालत ने साफ किया कि केवल सरकारी एजेंसियों के भरोसे समस्या का समाधान संभव नहीं है और इसके लिए आम लोगों को भी अपनी आदतें बदलनी होंगी।