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खराब इंटरनेट और कॉल ड्रॉप पर संसद में बड़ी बैठक, टेलीकॉम कंपनियों से मांगा जाएगा जवाब

Net Neutrality India Telecom: खराब इंटरनेट, कॉल ड्रॉप और मोबाइल नेटवर्क की लगातार शिकायतों के बीच 26 मई को संसद की स्थायी समिति की अहम बैठक होगी। बैठक में TRAI और दूरसंचार विभाग टेलीकॉम सेवाओं की गुणवत्ता, उपभोक्ता अधिकारों और नेट न्यूट्रैलिटी जैसे मुद्दों पर जवाब देंगे।

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भारत

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Rahul Yadav

May 26, 2026

Net Neutrality India Telecom

Net Neutrality India Telecom (AI Image)

Net Neutrality India Telecom:देश में खराब इंटरनेट, कॉल ड्रॉप और मोबाइल नेटवर्क की लगातार शिकायतों के बीच संसद की स्थायी समिति (संचार और सूचना प्रौद्योगिकी) की अहम बैठक 26 मई को होने जा रही है। बैठक सुबह 11 बजे संसद भवन एनेक्सी (PHA) में शुरू होगी, जिसमें टेलीकॉम सेक्टर में सेवाओं की गुणवत्ता (QoS) और उपभोक्ता संरक्षण जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।

बैठक में संचार मंत्रालय के दूरसंचार विभाग (DoT) और भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (TRAI) के अधिकारी समिति को प्रस्तुति देंगे। खास बात यह है कि बैठक में नेट न्यूट्रैलिटी के मुद्दे पर भी विशेष फोकस रहेगा।

कॉल ड्रॉप और स्लो इंटरनेट पर होगी चर्चा

देशभर में मोबाइल यूजर्स लंबे समय से कॉल ड्रॉप, कमजोर नेटवर्क और इंटरनेट स्पीड को लेकर शिकायत करते रहे हैं। संसद की यह बैठक इन्हीं समस्याओं को लेकर टेलीकॉम कंपनियों की जवाबदेही तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, समिति यह जानने की कोशिश करेगी कि कंपनियां सेवा गुणवत्ता सुधारने के लिए क्या कदम उठा रही हैं और उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जा रही है।

क्या है नेट न्यूट्रैलिटी?

नेट न्यूट्रैलिटी का मतलब इंटरनेट पर सभी वेबसाइट और ऑनलाइन सेवाओं को समान व्यवहार मिलना है। यानी कोई भी टेलीकॉम या इंटरनेट कंपनी किसी वेबसाइट, ऐप या सेवा को तेज या धीमा नहीं कर सकती। विशेषज्ञ मानते हैं कि नेट न्यूट्रैलिटी इंटरनेट की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है।

वैश्विक स्तर पर भी मजबूत हो रही भारत की भूमिका

हाल ही में जिनेवा में आयोजित इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन (ITU) काउंसिल 2026 की बैठक में भारत ने वैश्विक डिजिटल और टेलीकॉम नीति में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई।

भारत ने वर्ष 2030 में ITU प्लेनिपोटेंशियरी कॉन्फ्रेंस की मेजबानी का प्रस्ताव रखा, जिसे ITU काउंसिल ने स्वीकार कर लिया। इस प्रस्ताव को नवंबर 2026 में कतर के दोहा में होने वाले ITU सम्मेलन में औपचारिक मंजूरी मिलने की संभावना है।

भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने वैश्विक टेलीकॉम सहयोग, डिजिटल गवर्नेंस और ITU कार्यक्रमों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा की।

संसद की बैठक पर टिकी नजरें

मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं आज आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुकी हैं। ऐसे में संसद की इस बैठक को उपभोक्ताओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बैठक के बाद टेलीकॉम कंपनियों की सेवा गुणवत्ता और उपभोक्ता अधिकारों को लेकर नए निर्देश या सख्ती देखने को मिल सकती है।