
स्ट्रीट डॉग मामले में सुप्रीम कोर्ट का कड़ा आदेश (ANI/Patrika Graphic)
Street Dog Case: सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को आवारा कुत्तों से जुड़े मामले पर सुनवाई के दौरान बहस में कुत्तों के मूड, काउंसलिंग, कम्युनिटी डॉग्स और इंस्टीट्यूशनलाइज्ड डॉग्स जैसे मुद्दे सामने आए। जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि मामला केवल काटने तक सीमित नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आवारा कुत्तों से सड़क पर दुर्घटनाओं का भी खतरा है। जस्टिस ने सवाल उठाया कि “सुबह-सुबह कौन सा कुत्ता किस मूड में है, यह कोई कैसे पहचान सकता है?”
आवारा कुत्तों के पक्ष में पैरवी कर रहे वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि मंदिरों और सार्वजनिक स्थानों पर जाते समय उन्हें कभी किसी कुत्ते ने नुकसान नहीं पहुंचाया। सुप्रीम कोर्ट ने जवाब दिया, “आप खुशकिस्मत हैं, लेकिन लोग काटे जा रहे हैं, बच्चे प्रभावित हो रहे हैं और जान तक जा रही है।” कपिल सिब्बल ने आगे कहा कि किसी को काटने वाले कुत्ते को पकड़कर सेंटर्स में ले जाया जाएगा, नसबंदी की जाएगी और फिर उसी इलाके में छोड़ दिया जाएगा। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने मजाकिया अंदाज में कहा कि बस एक चीज बाकी रह गई है कुत्तों को काउंसलिंग देना, ताकि वापस छोड़े जाने पर वे किसी को काट न सकें।
इस मामले की सुनवाई 7 जनवरी को जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच द्वारा कई याचिकाओं पर हो रही है। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि कितनी याचिकाएं लंबित हैं। यह मामला 28 जुलाई 2025 को सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में आया था, जब दिल्ली में आवारा कुत्तों द्वारा काटे जाने और रैबीज जैसी बीमारियों पर एक मीडिया रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी। अब तक इस पर कुल पांच सुनवाई हो चुकी हैं।
Updated on:
07 Jan 2026 01:28 pm
Published on:
07 Jan 2026 01:17 pm
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