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‘उदयपुर फाइल्स’ पर लगेगी रोक! सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट को भेजा मामला

Supreme Court on Udaipur Files Release: सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म 'उदयपुर फाइल्स - कन्हैया लाल टेलर मर्डर' की रिलीज से जुड़ा मामला दिल्ली हाई कोर्ट को भेज दिया है। इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट के फिल्म की रिलीज पर रोक लगाई थी।

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भारत

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Devika Chatraj

Jul 25, 2025

'उदयपुर फाइल्स' पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म 'उदयपुर फाइल्स - कन्हैया लाल टेलर मर्डर' की रिलीज से जुड़ा मामला दिल्ली हाई कोर्ट को भेज दिया है। यह फिल्म राजस्थान के उदयपुर में 2022 में हुए कन्हैया लाल की हत्या पर आधारित है, जिसने देश भर में सनसनी मचा दी थी। इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) के फिल्म की रिलीज पर रोक के आदेश को निर्माता अमित जॉनी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

क्या है पूरा मामला?

उदयपुर फाइल्स 2022 में उदयपुर के कन्हैया लाल की हत्या पर आधारित है, जिनकी कथित तौर पर मोहम्मद रियाज और मोहम्मद गौस ने हत्या कर दी थी। हत्यारों ने दावा किया था कि यह हत्या कन्हैया लाल द्वारा पूर्व बीजेपी प्रवक्ता नूपुर शर्मा के समर्थन में सोशल मीडिया पोस्ट साझा करने के जवाब में की गई थी। इस घटना ने देश भर में आक्रोश पैदा किया था, और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने मामले की जांच शुरू की थी। आरोपियों पर गैरकानूनी गतिविधियां (निवारण) अधिनियम (यूएपीए) और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।

दिल्ली हाईकोर्ट ने लगाई रोक

फिल्म को सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) ने रिलीज के लिए मंजूरी दे दी थी, और इसे 11 जुलाई को सिनेमाघरों में रिलीज होना था। हालांकि, दिल्ली हाई कोर्ट ने 10 जुलाई को फिल्म की रिलीज पर रोक लगा दी, क्योंकि याचिकाकर्ताओं, जिसमें जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी और पत्रकार प्रशांत टंडन शामिल थे, ने दावा किया कि फिल्म सांप्रदायिक दंगों को बढ़ावा दे सकती है।

निर्माताओं का तर्क

फिल्म के निर्माता अमित जॉनी और वरिष्ठ वकील गौरव भाटिया ने तर्क दिया कि सीबीएफसी ने फिल्म को 55 कट्स के साथ मंजूरी दी थी, और यह किसी समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि "अतिवाद" के खिलाफ है। उन्होंने दावा किया कि रिलीज पर रोक से 1,750 सिनेमाघरों में बुकिंग प्रभावित हुई और निर्माता, निर्देशक, और कन्हैया लाल के बेटे को जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं।

याचिकाकर्ताओं का तर्क

मोहम्मद जावेद और अन्य याचिकाकर्ताओं ने कहा कि फिल्म का ट्रेलर और प्रचार सामग्री सांप्रदायिक रूप से उत्तेजक है, जो मुकदमे को प्रभावित कर सकती है और सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचा सकती है।