25 मार्च 2026,

बुधवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

क्या दोबारा हिंदू धर्म अपनाने से वापस मिल जाता है SC का दर्जा? सुप्रीम कोर्ट ने दिया जवाब

धर्मांतरण के बाद SC दर्जा खोने को लेकर क्या बोली सुप्रीम कोर्ट, जानें जवाब।

2 min read
Google source verification

भारत

image

Devika Chatraj

Mar 25, 2026

सुप्रीम कोर्ट (ANI)

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक अहम फैसला सुनाया है कि अनुसूचित जाति (SC) का व्यक्ति यदि हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म में धर्मांतरण करता है, तो वह तुरंत और पूरी तरह से SC का दर्जा खो देगा।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला

जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए स्पष्ट किया कि अनुसूचित जाति का दर्जा केवल उन्हीं धर्मों तक सीमित है जो संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950 के अनुच्छेद 3 में उल्लिखित हैं।

धर्म परिवर्तन के बाद नहीं माना जाएगा SC का

पीठ ने कहा हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म को अपनाने वाले व्यक्ति को अनुसूचित जाति का सदस्य नहीं माना जाएगा। यह प्रतिबंध स्पष्ट और पूर्ण है।

क्या धर्मांतरण के बाद SC का दर्जा दोबारा पाया जा सकता है?

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि धर्मांतरण के बाद व्यक्ति फिर से अनुसूचित जाति का दर्जा प्राप्त कर सकता है, लेकिन इसके लिए तीन जरुरी शर्तें पूरी करनी होंगी मूल जाति प्रमाणित होना होगा। व्यक्ति को साबित करना होगा कि उसका जन्म उसी जाति में हुआ था, जो अनुसूचित जाति की सूची में शामिल है।व्यक्ति को यह दिखाना होगा कि उसने अपने पिछले धर्म को पूरी तरह छोड़कर हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म में सच्ची वापसी की है। व्यक्ति को यह प्रमाण देना होगा कि उसकी मूल जाति के अन्य सदस्य उसे फिर से स्वीकार कर चुके हैं। अगर इनमें से कोई भी शर्त पूरी नहीं होती, तो SC का दर्जा वापस नहीं मिलेगा।

क्या था मामला?

यह मामला पादरी सी. आनंद और ए.आर. रेड्डी से जुड़ा था। पादरी आनंद का जन्म अनुसूचित जाति में हुआ था। बाद में उन्होंने ईसाई धर्म अपनाया और पादरी के रूप में कार्यरत रहे। 2021 में उन्होंने आंध्र प्रदेश के एक गांव में हमला होने के बाद SC/ST एक्ट के तहत FIR दर्ज कराई। आरोपियों ने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट का रुख किया। हाई कोर्ट ने 30 अप्रैल 2025 को निर्णय दिया कि यदि कोई व्यक्ति ईसाई धर्म अपनाता है और उसे सक्रिय रूप से मानता है, तो वह SC का सदस्य नहीं माना जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश को बरकरार रखा।