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देश भर के थानों में CCTV की कमी और बाढ़ पर सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वत: संज्ञान, केंद्र व राज्य सरकारों से मांगा जवाब

देश भर के थानों में सीसीटीवी की कमी पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है। मीडिया रिपोर्टों के आधार पर उच्चतम न्यायालय ने यह फैसला लिया।

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Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार की लगाई फटकार (SC Website)

देश भर के पुलिस थानों में सीसीटीवी (CCTV) की कमी और खराब स्थिति और उत्तर भारत में आई बाढ़ पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने मीडिया रिपोर्ट के आधार पर स्वत: संज्ञान लिया। कोर्ट ने कहा कि इस साल हिरासत में 11 लोगों की मौत की घटनाएं सामने आई है। इसके साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल की नदियों में लकड़ियों के बहने का भी जिक्र किया। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, हिमाचल सरकार, पंजाब सरकार, हरियाणा सरकार को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है।

साल 2020 में दिए थे सभी थानों में CCTV लगाने के निर्देश

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने साल 2020 में एक मामले की सुनवाई के दौरान देश भर के थानों में सीसीटीवी लगाने के आदेश दिए थे। उस आदेश में कोर्ट ने सभी राज्यों को पुलिस स्टेशनों में ऑडियो रिकॉर्डिंग के साथ CCTV कैमरे लगाने को कहा था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक यह कैमरे, थाने के बाहर, वॉशरूम के बाहर, लॉकअप, कॉरिडोर, लॉबी, रिसेप्शन, सब इंस्पेक्टर और इंस्पेक्टर के कमरे में लगाए जाने थे।

इन जगहों पर लगाने को कहा था

सुप्रीम कोर्ट ने सीसीटीवी सिस्टम के कामकाज की देखरेख के लिए राज्य के गृह सचिव, डीजीपी, राज्य महिला आयोग अध्यक्ष का पैनल बनाने को कहा था। इसके साथ ही, CBI, NIA, ED, NCB, डायरेक्ट्रेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलीजेंस और सीरियस फ्रॉड इनवेस्टीगेशन ऑफिस में भी कोर्ट ने CCTV लगाने के निर्देश दिए थे। जिला स्तर पर भी कमेटी बनाने का निर्देश दिया था।

कोर्ट ने उस समय निर्देश देते हुए कहा था कि CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग को 18 महीने तक रखा जाए। साथ ही, हर जिले में मानवाधिकार न्यायालय की स्थापना की जाए ताकि हिरासत में होने वाली घटनाओं की शिकायत की जाए।

5 साल बाद भी नहीं बदली तस्वीर

पांच साल बाद भी जमीनी हकीकत नहीं बदली। देश के कई थानों में कैमरे या तो लगे ही नहीं हैं या फिर बंद पड़े रहते हैं। कई मामलों में पुलिस “तकनीकी खराबी” या “फुटेज उपलब्ध नहीं” कहकर पल्ला झाड़ लेती है। साथ ही, हिरासत में मौतों के मामलों में इजाफा को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अब संज्ञान लिया है। अदालत ने साफ कहा कि ओवरसाइट समितियों को कठोरता से काम करना होगा और हर मामले में जवाबदेही तय करनी होगी।