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Taxation: कैपिटल एसेट्स बेचने पर हुए मुनाफा पर लगता है टैक्स, जानें बचाने का उपाय

Taxation news: अगर मकान 2 साल या उससे ज्यादा समय तक अपने पास रखकर बेचा जाता है तो इसे लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) माना जाता है और इस पर इंडेक्सेशन बेनिफिट के साथ 20% टैक्स लगता है। वहीं 24 महीने से पहले मकान बेचने से हुए लाभ को शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन माना जाता है।

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Taxation news: वित्त वर्ष 2023-24 खत्म होने को है। टैक्स सेविंग इन्वेस्टमेंट के लिए केवल 15 दिन बचा है। वहीं, पिछले एक साल में अगर आपको घर-जमीन जैसी प्रॉपर्टी बेचने पर मुनाफा हुआ है तो उस पर कैपिटल गेन टैक्स बचाने के लिए भी निवेश करने की अंतिम तिथि 31 मार्च ही है। प्रॉपर्टी बेचने से हुई कमाई पर कैपिटल गेन पर दो तरह से टैक्स लगता है। अगर मकान 2 साल या उससे ज्यादा समय तक अपने पास रखकर बेचा जाता है तो इसे लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (एलटीसीजी) माना जाता है और इस पर इंडेक्सेशन बेनिफिट के साथ 20% टैक्स लगता है। वहीं 24 महीने से पहले मकान बेचने से हुए लाभ को शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन माना जाता है। इसे रेगुलर इनकम में जोड़ दिया जाता है और इनकम टैक्स स्लैब के मुताबिक इस पर टैक्स चुकाना पड़ता है।



प्रॉपर्टी पर कैपिटल गेन के कैलकुलेशन में कॉस्ट ऑफ एक्यूजेशन यानी प्रॉपर्टी खरीदने का कुल खर्च काफी मायने रखता है। कॉस्ट ऑफ एक्यूजेशन में प्रॉपर्टी की खरीद कीमत के अलावा स्टाम्प ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन फीस, ब्रोकरेज, अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी के मामले में जीएसटी जैसी चीजें शामिल होती हैं। प्रॉपर्टी की मरम्मत या रेनोवेशन के लिए किया गया खर्च भी कॉस्ट ऑफ एक्यूजेशन का हिस्सा माना जा सकता है। इन खर्च को क्लेम करने के लिए आपके पास ट्रांसफर डीड, बिल समेत अन्य दस्तावेज होना चाहिए।



कैपिटल गेन अकाउंट स्कीम: अगर आप कैपिटल गेन से नया घर या प्रॉपर्टी नहीं खरीद पाए हैं या इसे सरकारी बॉन्ड में निवेश करने की इच्छा नहीं है तो टैक्स बचाने के लिए इस राशि को सरकारी बैंकों के कैपिटल गेन अकाउंट स्कीम (सीजीएएस) में जमा करा सकते हैं। आइटीआर फाइल करते वक्त सीजीएएस में जमा पैसे पर टैक्स छूट का दावा तकर सकते हैं।