
भारतीय न्याय संहिता, भारतीय न्याय सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य बिल आज राज्य सभा से पास हो गया। तीनों बिल बुधवार को लोकसभा से पास हो चुका था। दोनों सदनों से पारित होने के बाद मंजूरी के लिए इसे राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा। ये तीनों बिल राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद कानून बन जाएंगे। बिल पास होते ही राज्यसभा को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। बता दें कि नए बिल में रेप, देशद्रोह आदि में कड़ी सजा का प्रावधान किया गया है। आज गुरुवार को यह बिल केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने राज्यसभा के समक्ष रखा, जिसे ध्वनि मत से पारित किया गया।
क्या बदलाव होगा
नया कानून बनने पर धारा 375 और 376 की जगह बलात्कार की धारा 63 होगी। सामूहिक बलात्कार की धारा 70 होगी, हत्या के लिए धारा 302 की जगह धारा 101 होगी। बिल पारित होने के उपरांत राज्यसभा भी अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई।
बिल पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में कहा, "आज मैं जो बिल राज्यसभा में लेकर आया हूं, उनका उद्देश्य दंड देने का नहीं है, इसका उद्देश्य न्याय देना है। इन विधेयकों की आत्मा भारतीय है। व्यास, बृहस्पति, कात्यान, चाणक्य, वात्स्यायन, देवनाथ ठाकुर, जयंत भट्ट, रघुनाथ शिरोमणि अनेक लोगों ने जो न्याय का सिद्धांत दिया है, उसे इसमें कॉन्सेप्टुलाइज़ किया गया है।"
गृहमंत्री ने बताया कि देश के 97 फ़ीसदी थानों का डिजिटलाइजेशन हो चुका है। 82 प्रतिशत पुलिस स्टेशनों का रिकॉर्ड डिजिटल हो गया है। एफआईआर से लेकर जजमेंट तक पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन हो जाएगी। जीरो एफआईआर व ई-एफआईआर होगी। देशभर के सारे सीसीटीवी कैमरा चाहे वे कहीं भी लगे हों, सिस्टम के साथ इंटीग्रेटेड हो जाएंगे।
भारतीय दर्शन को स्थान दिया गया
आगे शाह ने कहा ‘‘इस नए कानून को ध्यान से पढ़ने पर पता चलेगा कि इसमें न्याय के भारतीय दर्शन को स्थान दिया गया है। हमारे संविधान निर्माताओं ने भी राजनीतिक न्याय, आर्थिक न्याय और सामाजिक न्याय को बरकरार रखने की गारंटी दी है। संविधान की यह गारंटी 140 करोड़ के देश को यह तीनों विधेयक देते हैं।’’
इतने साल में न्याय दिलाना उद्देश्य
राज्यसभा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, ''जो लोग सदन के बाहर पूछते हैं कि इस कानून से क्या होगा? मैं उन्हें बताना चाहता हूं कि ये कानून वैलेंस ऑफ वर्क को ध्यान में रखकर लाए गए हैं। इसे लागू होने के बाद तारीख पर तारीख का जमाना नहीं रहेगा। किसी भी मामले में 3 साल में न्याय दिलाने का उद्देश्य है। जो कहते हैं कि नए कानूनों की जरूरत क्या है, उनको स्वराज का मतलब नहीं पता, इसका मतलब स्व शासन नहीं है। इसका मतलब स्व धर्म, भाषा, संस्कृति को आगे बढ़ाना है। गांधी जी ने शासन परिवर्तन की लड़ाई नहीं लड़ी, उन्होंने स्वराज की लड़ाई लड़ी। आप 75 साल से 60 साल में सत्ता में बैठे, लेकिन स्व को लगाने का काम नहीं किया। ये काम मोदी जी ने किया।''
Published on:
21 Dec 2023 09:46 pm

बड़ी खबरें
View Allबिहार चुनाव
राष्ट्रीय
ट्रेंडिंग
