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Tirupati Stampede: टोकन बंटने से पहले ही मची भगदड़, 6 की मौत 25 घायल, जानें देर रात की पूरी कहानी

Tirupati Stampede: भगदड़ की घटना उस समय हुई जब एक महिला भक्त अस्वस्थ महसूस करने लगी और उसकी मदद के लिए गेट खोला गया। इस गेट के खुलने से भक्तों की भीड़ अचानक आगे बढ़ी, जिससे अफरा-तफरी मच गई और भगदड़ की स्थिति पैदा हो गई।

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Tirupati Stampede: आंध्र प्रदेश के तिरुपति में बुधवार शाम बड़ा हादसा हो गया, जिसमें छह लोगों की मौत हो गई। यह भगदड़ तब मची जब सैकड़ों भक्त भगवान वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर के वार्षिक वैकुंठ द्वार दर्शनम के लिए टिकट प्राप्त करने के लिए एकत्र हुए थे। यह घटना तिरुमाला पहाड़ियों पर स्थित मंदिर के पास हुई, जहां भक्तों की भारी भीड़ टोकन प्राप्त करने के लिए धक्का-मुक्की कर रही थी।

चंद्रबाबू नायडू ने किया शोक व्यक्त

घटना के बाद, पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश की, लेकिन स्थिति बेकाबू हो गई, जिससे भगदड़ का सामना करना पड़ा। मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने इस घटना पर शोक व्यक्त करते हुए इसे दुखद बताया। उन्होंने अधिकारियों को राहत कार्यों के लिए तुरंत घटनास्थल पर पहुंचने और घायलों को चिकित्सा सहायता प्रदान करने का निर्देश दिया। इसके अलावा, उन्होंने जिला और टीटीडी अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा और स्थिति का जायजा लिया।

वैकुंठ द्वार दर्शन के लिए जुटी थी हजारों की भीड़

वैकुंठ द्वार दर्शनम 10 जनवरी से शुरू होने वाला था, जो एक महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन है, और इस अवसर पर देशभर से बड़ी संख्या में भक्त तिरुपति आए थे। ऐसे आयोजनों के दौरान इस तरह की भगदड़ की घटनाएँ चिंता का विषय बन जाती हैं, और इससे संबंधित सुरक्षा व्यवस्था और प्रबंधन की आवश्यकता को फिर से रेखांकित किया जाता है।

तिरुपति में क्या हुआ था देर शाम?

तिरुपति में हुई भगदड़ की घटना और उसकी वजह अब और स्पष्ट हो गई है। 9 जनवरी को वैकुंठ एकादशी उत्सव के लिए दर्शन टोकन वितरित करने के लिए तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) द्वारा विशेष काउंटर स्थापित किए गए थे। ये टोकन तिरुपति के विष्णु निवासम मंदिर के पास स्थित बैरागीपट्टेडा के एमजीएम हाई स्कूल में भक्तों को दिए जा रहे थे।

बुधवार सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ इन काउंटरों पर टोकन लेने के लिए जुटने लगी, और शाम तक भीड़ इतनी बढ़ गई कि स्थिति अनियंत्रित हो गई। रिपोर्टों के अनुसार, टीटीडी के अध्यक्ष बीआर नायडू ने बताया कि भगदड़ की घटना उस समय हुई जब एक महिला भक्त अस्वस्थ महसूस करने लगी और उसकी मदद के लिए गेट खोला गया। इस गेट के खुलने से भक्तों की भीड़ अचानक आगे बढ़ी, जिससे अफरा-तफरी मच गई और भगदड़ की स्थिति पैदा हो गई।

यह घटना इस बात को रेखांकित करती है कि श्रद्धालुओं की भारी संख्या और उचित प्रबंधन की कमी के कारण ऐसी घटनाएं हो सकती हैं। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बेहतर व्यवस्था की आवश्यकता है, विशेष रूप से जब धार्मिक आयोजनों में बड़ी संख्या में भक्त शामिल होते हैं।

इस घटना के बाद, टीटीडी और स्थानीय अधिकारियों ने स्थिति को संभालने के लिए राहत कार्य शुरू किए, लेकिन यह घटना एक बड़ा सुरक्षा मुद्दा बन गई है। अब इस पर कड़ी कार्रवाई और बेहतर सुरक्षा प्रोटोकॉल की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है ताकि भविष्य में इस तरह की भगदड़ की घटनाओं को रोका जा सके।

टीटीडी ने मांगी माफी

तिरुपति में हुई भगदड़ की घटना पर तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) ने माफी मांगी है। टीटीडी के बोर्ड सदस्य भानु प्रकाश ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण घटना बताते हुए भगवान वेंकटेश्वर स्वामी के भक्तों से इस हादसे के लिए माफी मांगी। उन्होंने स्वीकार किया कि इस घटना में कुछ खामियां थीं और कड़ी कार्रवाई की जाएगी, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि खोई हुई जिंदगियां वापस नहीं लाई जा सकतीं।

इस घटना के बाद एक वीडियो भी वायरल हुआ, जिसमें पुलिस कर्मियों को महिला भक्तों को सीपीआर (cardiopulmonary resuscitation) देते और घायल व्यक्तियों को एंबुलेंस में ले जाते हुए देखा गया। यह दृश्य इस बात को दर्शाता है कि पुलिस और अन्य राहत कार्यकर्ता स्थिति को संभालने में जुटे थे, लेकिन इतनी बड़ी भीड़ और भगदड़ को नियंत्रित करना मुश्किल हो गया।

प्रधानमंत्री मोदी ने जताया दुख

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी तिरुपति में हुई भगदड़ पर गहरा दुख जताया। उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से पीड़ितों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायल व्यक्तियों की शीघ्र स्वस्थता की कामना की। प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि आंध्र प्रदेश सरकार घटना के पीड़ितों को हर संभव सहायता प्रदान कर रही है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी तिरुपति भगदड़ में जान गंवाने वालों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और दुख जताया। इस घटना ने न केवल आंध्र प्रदेश बल्कि पूरे देश को गहरे शोक में डुबो दिया है। यह हादसा इस बात को भी रेखांकित करता है कि धार्मिक आयोजनों और श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था और बेहतर प्रबंधन की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।