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Toilets For Women: देश में नौकरियों में महिलाओं की बढ़ रही तादाद लेकिन टॉयलेट की संख्या अभी भी काफी कम

Toilets For Women: देश में महिलाओं की संख्या नौकरियों में बढ़ रही है। भले ही महिलाओं की रुचि नौकरी करने में बढ़ी हो लेकिन कार्यस्थल पर टॉयलेट को लेकर अभी भी समस्या बनी हुई है।

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नौकरी में बढ़ी महिलाएं पर टॉयलेट पर्याप्त नहीं

नौकरी में बढ़ी महिलाएं पर टॉयलेट पर्याप्त नहीं

Toilets For Women: भारत में महिलाओं की नौकरियों में रुचि बढ़ रही है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ताजा रिपोर्ट के अनुसार देश में पहली बार स्कूली शिक्षकों में महिला शिक्षकों की संख्या बढ़कर पुरुषों से अधिक करीब 53.3 प्रतिशत तक हो गई है। 2023-24 के लिए जारी UDISE (यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इनफोरमेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन) रिपोर्ट अनुसार महिला शिक्षकों को यह अब तक का सबसे अधिक अनुपात है। भले ही महिलाओं की नौकरियों तादाद बढ़ रही है लेकिन ऑफिस या कार्यस्थल पर टॉयलेट की समस्या अभी भी बनी हुई है। हालांकि केंद्र सरकार इसके लिए प्रयासरत है।

कार्यस्थल पर मिलते हैं गंदे टॉयलेट

देश में महिलाओं की नौकरी करने की तादाद बढ़ रही है, लेकिन कार्यस्थल पर उनको कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। सबसे बड़ी जो समस्या महिलाओं के सामने आती है वो टॉयलेट की है। इसी बीच सामने आया है कि साफ-सफाई नहीं होने के कारण महिलाएं ड्यूटी के दौरान कार्यस्थल पर बने टॉयलेट का इस्तेमाल नहीं कर पाती हैं। 

सरकार ने स्कूलों में टॉयलेट के लिए उठाए बड़े कदम

साल 2024 में एक जनहित याचिका के जवाब में केंद्र सरकार ने SC को बताया कि देश के 97.5 प्रतिशत से अधिक स्कूलों में अब शौचालयों की व्यवस्था है। ये आंकड़े बताते है कि देश के सभी प्रकार के स्कूलों में छात्राओं और महिला कर्मचारियों की स्वच्छता और गोपनियता सुनिश्चित करने के लिए बड़े कदम उठाए गए हैं।

राज्यस्कूलों में टॉयलेट का प्रतिशत
दिल्ली, गोवा और पुडुचेरी100 प्रतिशत
पश्चिम बंगाल99.9 प्रतिशत
यूपी99.8 प्रतिशत
तमिलनाडु 99.7 प्रतिशत
केरल99.6 प्रतिशत
गुजरात99.5 प्रतिशत
पंजाब99.5 प्रतिशत
जम्मू कश्मीर99.2 प्रतिशत

7 फीसदी से कम जिला कोर्ट में महिलाओं के लिए अनुकूल है शौचालय

डाउन टू अर्थ की एक रिपोर्ट के अनुसार SC के सेंटर फॉर रिसर्च एंड प्लानिंग द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट ‘स्टेट ऑफ द जुडिशरी: रिपोर्ट ऑन इंफ्रास्ट्रक्चर, बजटिंग, ह्यूमन रिसोर्सेज एंड आईसीटी’ में कहा गया है कि देश के केवल 6.7 प्रतिशत जिला न्यायालय परिसरों में मौजूद टॉयलेट ही महिलाओं के लिए अनुकूल है, जबकि देश के 19.7 फीसदी जिला न्यायालयों में महिलाओं के लिए अलग से टॉयलेट की व्यवस्था नहीं है। इसके अलावा देश की 80 प्रतिशत जिला कोर्ट में महिलाओं के लिए अलग से टॉयलेट की सुविधा है लेकिन 73.4 प्रतिशत जिला कोर्ट में टॉयलेट में सैनिटरी नैपकिन वेंडिंग मशीन की सुविधा नहीं है। 

कार्यस्थल पर महिला टॉयलेट है बड़ा मुद्दा 

देश में कार्यस्थल पर महिला टॉयलेट की स्थिति एक बड़ा मुद्दा है, जो कि महिला कर्मचारियों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और कार्यस्थल पर उनकी संतुष्टि से जुड़ा हुआ है। हालांकि इस ओर कुछ सुधार हुआ है लेकिन कई कार्यस्थलों पर महिलाओं के लिए टॉयलेट की संख्या पर्याप्त नहीं है और स्थिति को लेकर भी समस्याएं बनी हुई है।

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