
Unakoti of Tripura, where 99 lakh 99 thousand 999 idols were found, may get tag of world heritage
नॉर्थ-ईस्ट का अंगोर वाट कहा जाने वाला उनाकोटी की मूर्तियों को वर्ल्ड हेरिटेड टैग दिलाने का प्रयास हो रहा है। इन मुर्तियों को त्रिपुरा की रघुनंदन पहाड़ियों पर स्थित एक पहाड़ पर तराशा गया है। यह त्रिपुरा के अगरतला से लगभग 180 किलोमीटर दूर है। बंगाली भाषा में उनाकोटी का मतलब ही होता है एक करोड़ से एक कम। कहा जाता है कि यहां 99 लाख 99 हजार 999 मूर्तियां हैं। इन्हें किसने और कब बनाया, इस बात की कोई ठोस जानकारी नहीं है। मगर कहा जाता है कि ये 8वीं या 9वीं शताब्दी में बनाई गई हैं।
रहस्यों से भरी है यह जगह
उनाकोटी को रहस्यों से भरी जगह भी कहा जाता है, क्योंकि इस पहाड़ी इलाके में चारों ओर दूर-दूर तक घना जंगल है। इतने घने जंगल में किसने लाखों मूर्तियों को बनाया होगा। पत्थरों पर मूर्तियां बनाना कोई आसान काम नहीं है। इसमें सालों लगते हैं, ऐसे में यह जगह आज भी एक रहस्य है। हर साल अप्रैल के महीने में इस जगह पर एक बहुत बड़ा मैला भी लगता है जिसे अशोकाष्टमी का मेला कहा जाता है।
कई देवी-देवताओं की मूर्तियां है मौजूद
यहां भगवान गणेश की एक दुर्लभ और प्राचीन मूर्ति है। इसके अलावा विशाल पहाड़ में खुदी हुई भगवान शिव, नंदी बैल, मां दुर्गा और दूसरे देवताओं की मूर्तियां भी मौजूद हैं। यहां मौजूद कई मूर्तियां इतनी विशाल हैं कि उनके ऊपर से झरने बहते हैं। दरअसल, पहाड़ी में होने की वजह से बरसात के दिनों में यहां कई मूर्तियों के ऊपर से झरने बहते हैं।
कुछ मूर्तियां हो गई हैं खराब
यहां देश के कई हिस्से से लोग घूमने के लिए भी आते हैं। इस जगह पर पर्यटकों के साथ श्रद्धालु भी पूजा अर्चना के लिए आते रहते हैं। हालांकि कुछ खास मूर्तियों के पास आमजनों को जाने की अनुमति नहीं है। खराब मौसम, प्रदूषण के कारण इनमें से कुछ मूर्तियां खराब भी हो गई हैं। इस जगह के सरंक्षण का जिम्मा आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) ने अपने सिर ले रखा है। इसके बाद से यहां कि हालत में कुछ सुधार देखने को मिला है।
विश्व धरोहर बनाने के प्रयास में जुटी सरकार
हाल ही में केंद्र सरकार ने यहां के संरक्षण और पर्यटन विकास के लिए 12 करोड़ रुपए दिए थे। उनाकोटी को विश्व धरोहर बनाने के प्रयास में ही त्रिपुरा सरकार इस जगह के आस-पास पर्यटन स्थल बनवा रही है। सरकार का मानना है कि उनाकोटी के माध्यम से त्रिपुरा के इस हिस्से को पूरे भारत में सांस्कृतिक रूप से भी जोड़ा जा सकता है। इस जगह को विश्व धरोहर घोषित करने के लिए भारत सरकार का पुरातात्विक विभाग सक्रिय है।
नाम को लेकर प्रचलित है ये कहानी
उनाकोटि की इन मूर्तियों को लेकर एक कहानी प्रचलित है। कहानी के मुताबिक एक कालू नाम के शिल्पकार ने भगवान शिव और पार्वती से कैलाश पर्वत जाने की इच्छा जताई थी। भगवान शिव से वह बार-बार यहीं प्रार्थना करता रहता। जिसके बाद भगवान शिव ने उसे एक शर्त पर कैलाश पर्वत ले जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि अगर तुम एक रात में एक करोड़ देवी-देवताओं की मूर्तियां बना दोगे तो हम तुम्हें अपने साथ कैलाश पर्वत ले जाएंगे।
कालू इसके बाद मूर्तियां बनाने में जुट गया। उसने पूरी रात मूर्तियां बनाईं। मगर सुबह जब इन्हें गिना गया तो इनमें 1 मूर्ति कम थी। यानी कालू ने रात भर में 99 लाख, 99 हजार, 999 मूर्तियां बना ली थी। मगर 1 मूर्ति कम होने की वजह से भगवान कालू को कैलाश पर्वत नहीं ले गए। कहते हैं कि इसके बाद से ही इस जगह का नाम उनाकोटि यानी एक करोड़ से एक कम पड़ गया।
एक और कहानी कि है मान्यता
कहा जाता है कि काशी की ओर जाते समय भगवान शिव ने यहां पर एक रात गुजारी थी। उस वक्त उनके साथ 99 लाख 99 हजार 999 देवी-देवता भी यात्रा कर रहे थे। वो सभी लोग भी यहीं रुके थे। भगवान शिव ने सभी से कहा था कि सूर्योदय से पहले हमें काशी के लिए निकलना है। लेकिन भगवान शिव के अलावा सभी सोते रह गए। इससे क्रोधित होकर शिवजी ने सभी को पत्थर बनने का शाप दे दिया और तभी से सब लोग यहां पत्थर बन हुए हैं।
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Published on:
12 Dec 2022 01:18 pm
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