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‘देश में बिना घोषणा के इमरजेंसी जैसे हालात’, AAP अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज का मोदी सरकार पर बड़ा हमला

Saurabh Bhardwaj Statement: सौरभ भारद्वाज ने केंद्र सरकार पर संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए कहा कि लोकतंत्र बचाने के लिए उनकी स्वतंत्रता और निष्पक्षता बनाए रखना जरूरी है।
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भारत

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Devika Chatraj

•

Jun 25, 2026

Saurabh Bhardwaj

सौरभ भारद्वाज का मोदी सरकार पर हमला (ANI)

Saurabh Bhardwaj Attack Modi Govt: आम आदमी पार्टी (AAP) के दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज (Saurabh Bhardwaj) ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए देश की संवैधानिक और स्वतंत्र संस्थाओं को मजबूत बनाए रखना बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग, प्रवर्तन निदेशालय (ED), केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI), आयकर विभाग और सूचना का अधिकार (RTI) जैसी संस्थाएं लोकतंत्र की रीढ़ हैं।

मोदी सरकार ने संवैधानिक संस्थाओं को किया कमजोर

सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि पिछले 12 सालों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के दौरान इन संस्थाओं की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर लगातार सवाल खड़े हुए हैं। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने के बजाय संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर किया जा रहा है।

लोकतंत्र बचाने का बताया तरीका

AAP नेता ने कहा, अगर लोकतंत्र को बचाना है, तो सबसे पहले देश की संस्थाओं और संवैधानिक ढांचे की रक्षा करनी होगी। लेकिन पिछले कई सालों में हमने देखा है कि जिन संस्थाओं पर लोकतंत्र की मजबूती टिकी हुई है, उन्हें व्यवस्थित रूप से कमजोर किया जा रहा है।

बिना किसी आधिकारिक घोषणा के देश में इमरजेंसी जैसे हालात - सौरभ भारद्वाज

उन्होंने आगे दावा किया कि वर्तमान परिस्थितियों में देश में बिना किसी आधिकारिक घोषणा के भी इमरजेंसी जैसे हालात महसूस किए जा सकते हैं। भारद्वाज के अनुसार, लोकतांत्रिक मूल्यों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संस्थागत स्वायत्तता को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हुई हैं। सौरभ भारद्वाज के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है। विपक्ष लगातार केंद्र सरकार पर संस्थाओं के दुरुपयोग के आरोप लगाता रहा है, जबकि सरकार इन आरोपों को निराधार बताती रही है।

PM मोदी ने आपातकाल को लोकतंत्र पर हमला बताया

प्रधानमंत्री ने कहा कि आपातकाल भारतीय संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों पर एक गंभीर प्रहार था। इस अवधि में नागरिकों के मौलिक अधिकारों और स्वतंत्रताओं को सीमित कर दिया गया, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाया गया, तथा राजनीतिक नेताओं, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की आधारशिला मानी जाने वाली संस्थाओं को भी कमजोर करने का प्रयास किया गया।