
पानी के नीचे हिमस्खलन वैश्विक इंटरनेट नेटवर्क के लिए एक बड़ा खतरा पैदा कर सकता है। यह हिमस्खलन तब होता है, जब समुद्र तल पर बिछे हुए छोटे-छोटे कण अचानक विस्थापित हो जाने से तेज गति से बहने वाली धाराएं बनती हैं। ये शक्तिशाली धाराएं जब समुद्र तल से होकर गुजरती हैं तो महाद्वीपों के बीच इंटरनेट और संचार डेटा के लिए बिछी केबलों को क्षतिग्रस्त कर सकती है। दुनिया का नेटवर्क समुद्र में बिछी 550 से ज्यादा सक्रिय पनडुब्बी फाइबर ऑप्टिक केबल पर टिका है, जिसकी लंबाई 15 लाख किलोमीटर से अधिक है। यानी यह नेटवर्क केबल इतनी लंबी है कि इससे पृथ्वी को बीच से 35 बार लपेटा जा सकता है। इसलिए पानी के नीचे हिमस्खलन से यदि ये नष्ट हुई तो इसका असर और खर्च बड़ा होगा।
26 दिसम्बर 2006 को ताइवान में आए पिंगतुंग भूकंप के कारण समुद्र के अन्दर हिमस्खलन हुआ, जिससे दक्षिण-पूर्व एशिया को शेष विश्व से जोडऩे वाली कई समुद्री केबलें टूट गईं। इस घटना के कारण वैश्विक स्तर पर इंटरनेट ट्रैफिक और वित्तीय लेनदेन में उल्लेखनीय गिरावट आई। इस घटना की वजह से वैश्विक बाजारों को भारी नुकसान हुआ और नेटवर्क को पूरी तरह से बहाल करने में 39 दिन लगे थे, जिसमें लाखों डॉलर का खर्च आया था।
Updated on:
26 Aug 2024 08:59 am
Published on:
26 Aug 2024 06:59 am
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