
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह (फोटो - ANI)
US-Israel Iran War: इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। इसके चलते मिडिल ईस्ट में भी तनाव भी बहुत अधिक बढ़ गया है। आज इस जंग का सातवां दिन है और अब भी इन देशों के बीच हमले जारी है। इसी बीच भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की इस मामले पर प्रतिक्रिया सामने आई है। रक्षा मंत्री ने मिडिल ईस्ट के हालातों को लेकर चिंता जताई है और कहा है कि यह हालात अभी और कठिन हो सकते है।
पश्चिम एशिया का फारस की खाड़ी क्षेत्र लंबे समय से दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति का सबसे अहम केंद्र माना जाता है। दुनिया के कई बड़े देश अपनी तेल और गैस जरूरतों के लिए इसी क्षेत्र पर निर्भर हैं, इसलिए यहां किसी भी तरह का सैन्य या राजनीतिक तनाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है। इसी मुद्दे पर चिंता जाहिर करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से होर्मुज जलडमरूमध्य और फारस की खाड़ी क्षेत्र में अनिश्चितता बढ़ रही है, जिसका असर वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा, तेल सप्लाई और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है।
सिंह ने कोलकाता में मीडिया बातचती के दौरान कहा हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) और पूरा फारस की खाड़ी का इलाका दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी है। दुनिया के तेल और गैस व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में अगर इस क्षेत्र में किसी प्रकार की रुकावट या संघर्ष होता है तो तेल और गैस की सप्लाई पर सीधा असर पड़ता है। उन्होंने बताया कि सप्लाई में बाधा आने से ऊर्जा की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं, जिससे दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव पड़ता है। भारत जैसे ऊर्जा आयात करने वाले देशों के लिए भी यह स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान वैश्विक स्थिति लगातार जटिल होती जा रही है। अलग-अलग देश जमीन, हवा और समुद्र में अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने की प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। अब यह प्रतिस्पर्धा अंतरिक्ष तक भी पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा कि तकनीक और रक्षा क्षमताओं की यह दौड़ कई बार वैश्विक शांति के लिए चुनौती बन सकती है। उनका मानना है कि जब बड़ी शक्तियां एक-दूसरे के साथ टकराव की स्थिति में आती हैं, तो उसका असर सिर्फ उस क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता प्रभावित होती है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि सबसे चिंताजनक बात यह है कि असामान्य स्थितियां धीरे-धीरे सामान्य बनती जा रही हैं। लगातार बढ़ते तनाव, क्षेत्रीय संघर्ष और शक्ति संतुलन की बदलती स्थिति से अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था अधिक अस्थिर हो रही है। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात भविष्य में और अधिक गतिशील और जटिल हो सकते हैं। ऐसे समय में देशों के बीच संवाद, कूटनीति और सहयोग की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। उनका मानना है कि वैश्विक समुदाय को मिलकर ऐसी परिस्थितियों को संभालने के लिए संतुलित और जिम्मेदार दृष्टिकोण अपनाना होगा ताकि वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और आर्थिक स्थिरता सुरक्षित रह सके।
Updated on:
06 Mar 2026 12:37 pm
Published on:
06 Mar 2026 11:47 am
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