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Iran Israel US War: ट्रंप को ईरान का तगड़ा जवाब, कहा-न्यूयॉर्क का मेयर तय नहीं कर सकते और हमारे देश…

Middle East conflict: ईरान के उप-विदेश मंत्री सईद खातिबजादेह ने डोनाल्ड ट्रंप पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि अमेरिका का ईरान में सत्ता परिवर्तन का सपना कभी पूरा नहीं होगा। उन्होंने मौजूदा संघर्ष को ईरान के अस्तित्व की लड़ाई बताया।

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Iranian Deputy Foreign Minister Saeed Khatibzadeh

Iranian Deputy Foreign Minister Saeed Khatibzadeh (Photo/ANI)

Iran Israel US conflict: अमेरिका और इजराइल के साथ बढ़ते तनाव के बीच ईरान के उप-विदेश मंत्री सईद खातिबजादेह ने रायसीना डायलॉग में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके सत्ता परिवर्तन के प्रयासों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने मौजूदा संघर्ष को ईरान के अस्तित्व की लड़ाई बताते हुए कहा कि डोनाल्ड ट्रंप उनके देश में अपनी पसंद की सत्ता चाहते हैं, लेकिन वे अपनी मर्जी से न्यूयॉर्क का मेयर तक तय नहीं कर सकते, ईरान में सत्ता परिवर्तन तो बहुत दूर की बात है। ईरान की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि उनका 'प्लान ए' विफल हो चुका है और 'प्लान बी' भी पूरी तरह असफल होगा।

रायसीना डायलॉग से इतर उप-विदेश मंत्री ने अमेरिका-इजराइल युद्ध पर चर्चा करते हुए कहा, "हम प्रतिरोध कर रहे हैं और यह प्रतिरोध इतिहास, क्षेत्र, दुनिया तथा अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों की रक्षा के लिए है। ईरानी लोग बलिदान दे रहे हैं क्योंकि देश के खिलाफ अत्यंत गैर-जिम्मेदार और आक्रामक व्यवहार किया जा रहा है। यदि दूसरी तरफ से यह आक्रमण रुकता है, तो क्षेत्र में एक नई और सकारात्मक स्थिति बन सकती है।"

हम ईरान-भारत संबंधों को देते हैं महत्व

ईरान के उप-विदेश मंत्री ने भारत के साथ रिश्तों पर जोर देते हुए कहा, "मेरी भारत के विदेश मंत्री से संक्षिप्त मुलाकात हुई है। ईरान और भारत के बीच प्राचीन सभ्यतागत संबंध रहे हैं। हम इंडो-पर्शियन संस्कृति और साझा विरासत से जुड़े हैं, इसलिए हम ईरान-भारत संबंधों को बहुत अधिक महत्व देते हैं।" युद्ध समाप्त करने के किसी भी संभावित रास्ते पर उन्होंने दोहराया कि ईरान का यह कड़ा प्रतिरोध इतिहास के पन्नों में दर्ज होगा।

नाजी जर्मनी के दौर से की तुलना

सईद खातिबजादेह ने हिंद महासागर में एक ईरानी जहाज के डूबने की घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया दी और इसकी तुलना नाजी जर्मनी के काले दौर से की। उन्होंने कहा, "वह जहाज हमारे भारतीय मित्रों के निमंत्रण पर एक अंतरराष्ट्रीय अभ्यास में शामिल होने गया था। यह केवल एक औपचारिक कार्यक्रम था; जहाज पूरी तरह खाली था और उस पर कोई हथियार नहीं था। इसके बावजूद उस पर हमला किया गया। इतिहास में इसका एकमात्र उदाहरण नाजी काल में मिलता है, जब युद्ध क्षेत्र से दूर निहत्थे जहाजों को निशाना बनाया जाता था। इस हमले में कई युवा ईरानी नाविकों की जान गई है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। इसके लिए जिम्मेदार लोगों को बिना सजा के नहीं छोड़ा जा सकता।" अमेरिकी जमीनी हमले की किसी भी संभावना पर उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान किसी भी "औपनिवेशिक मिशन" को नाकाम करने के लिए पूरी तरह तैयार है।