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CDS बिपिन रावत के निधन पर उत्तराखंड में तीन दिन का राजकीय शोक घोषित

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सीडीएस बिपिन रावत के आकस्मिक निधन पर प्रदेश में 3 दिन का राजकीय शोक घोषित करने के निर्देश दिए हैं। बताया गया कि राज्य में कल यानि 9 से 11 दिसंबर तक राजकीय शोक घोषित किया गया है।

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Nitin Singh

Dec 09, 2021

uttarakhand gov declare 3 days state mourning over bipin rawat demise

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नई दिल्ली। देश के सीडीएस बिपिन रावत का आज एक विमान हादसे में निधन हो गया है। इस घटना को लेकर पूरे देश में शोक की लहर है। दुनियाभर के दिग्गज उनके निधन पर संवेदना व्यक्त कर रहे हैं। इसी बीच उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सीडीएस बिपिन रावत के आकस्मिक निधन पर प्रदेश में 3 दिन का राजकीय शोक घोषित करने के निर्देश दिए हैं। बताया गया कि राज्य में कल यानि 9 से 11 दिसंबर तक राजकीय शोक घोषित किया गया है। इस दौरान प्रदेश में सरकारी स्तर पर मनोरंजक कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जाएंगे। साथ ही सभी सरकारी कार्यालयों में राष्ट्रीय ध्वज आधे झुके रहेंगे। बता दें कि राजकीय शोक किसी अहम पद पर रहे शख्स के निधन पर घोषित किया जाता है।

उत्तराखंड में तीन दिनों का राजकीय शोक
आज तमिलनाडु के कुन्नूर जिले में सीडीएस बिपिन रावत को ले जा रहा सेना का हेलीकाप्टर दुर्घटनाग्रस्‍त हो गया। इस हादसे में सीडीएस बिपिन रावत और उनकी पत्‍नी समेत 13 लोगों की मौत हो गई। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सीडीएस जनरल बिपिन रावत के आकस्मिक निधन पर प्रदेश में तीन दिन (9 से 11 दिसंबर) का राजकीय शोक की घोषणा की है।

राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सीडीएस जनरल बिपिन रावत, उनकी पत्नी मधुलिका रावत सहित अन्य सैन्य अधिकारियों के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। सीएम ने कहा कि देश की सुरक्षा को अपने साहसिक निर्णय और सैन्य बलों का मनोबल ऊंचा बनाए रखने के लिए जनरल रावत द्वारा दिए गए योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा। इस घटना से देश को कभी न पूरी होने वाली क्षति हुई है। समूचे देश को आप पर गर्व है।

बता दें कि देश में किसी अहम पद पर रहने वाले शख्स के निधन पर राजकीय या राष्ट्रीय शोक घोषित किया जाता है। हालांकि पहले नियम कुछ और थे। दरअसल, पहले देश में केवल राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री रह चुके लोगों के निधन पर राजकीय या राष्ट्रीय शोक की घोषणा की जाती थी। वहीं आजादी के बाद स्वतंत्र भारत में पहला राष्ट्रीय शोक राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हत्या के बाद घोषित किया गया था।

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वहीं समय के साथ इस नियमों में बदलाव किए गए, जिनके मुताबिक अब गणमान्य व्यक्तियों के निधन पर भी केंद्र विशेष निर्देश जारी कर राष्ट्रीय शोक का ऐलान कर सकता है। इसके साथ ही देश में किसी बड़ी आपदा के वक्त भी राष्ट्रीय शोक घोषित किया जा सकता है। बता दें कि इसका एक पहलू राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार करना भी है। कई फिल्मी हस्तियों का भी अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया गया है।