
बच्चों के शारीरिक विकास के लिए आई रिपोर्ट्स में कई बार बताया गया है कि खेलकूद बच्चों के लिए कितना जरूरी है। लेकिन उस वक्त क्या हो जब बच्चों को खेलने के लिए कोई जगह ही न मिले। ऐसे में वह गली मोहल्लों में खेलते हैं। लेकिन लोग अपनी सुविधा के लिए बच्चों को गली में खेलने से मना कर देेते है। इसी बात को लेकर बच्चों ने उत्तराखंड के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा था। इस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने केंद्र व राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
बच्चों ने चीफ जस्टिस को लिखा था पत्र
क्रिकेट खेलने के लिए मैदान न होने और गली में खेलने से रोकने पर बच्चों ने उत्तराखंड के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा था, जिसमें बच्चों ने बताया था कि उनके आस पास या पड़ोस में कोई खेल का मैदान नहीं है। ऐसे में जब वो स्कूल के बाद गली में खेलने के लिए जाते हैं तो पास वाली आंटी या अंकल उनकी बॉल छुपा देते हैं।
कभी-कभी उनको डांटते हैं और गली में खेलने के लिए मना कर भगा देते हैं। बच्चों की ओर से पत्र में कहा गया है कि उनको खेलने के लिए जरूरी सामान और मैदान उपलब्ध कराया जाए।
बच्चों ने विराट कोहली से मांगी थी मदद
बच्चों ने विराट कोहली के साथ भी अपनी इस समस्या को सोशल मीडिया के माध्यम से साझा किया था। इस पर कोहली ने कहा कि बच्चों को रोको न टोको, उन्हें खेलने दो. क्योंकि, शुरुआत यहीं से होती है। सचिन तेंदुलकर, वीरेंद्र सहवाग, सौरभ गांगुली ने भी यहीं से शुरुआत की थी। सुनवाई पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि बच्चों के शारीरिक विकास के लिए खेल आवश्यक है। उसके लिए संसाधनों की आवश्यकता होती है।
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Published on:
18 Sept 2023 07:58 pm
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