
Demo Pic (फोटोः संसद टीवी/एएनआई वीडियो ग्रैब)
लोकसभा में विपक्ष के भारी हंगामे और विरोध के बीच केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) (वीबी-जी राम-जी) बिल, 2025 पेश किया। इस दौरान महात्मा गांधी के नाम हटाने के आरोपों पर शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि महात्मा गांधी हमारे दिलों में बसते है। गांधीजी और दीनदयाल जी का संकल्प सबसे नीचे के व्यक्ति के कल्याण का था। कांग्रेस ने जवाहर रोजगार योजना को बंद कर नई योजना शुरू की। इसका मतलब नेहरू का अपमान हो गया।
वहीं कांग्रेस महासचिव व सांसद प्रियंका गांधी ने कहा कि महात्मा गांधी मेरे परिवार के नहीं, मेरे परिवार जैसे ही हैं। पूरे देश की यही भावना है। कम से कम इसे स्थायी समिति के पास भेंजे। उन्होंने कहना कि हर योजना का नाम बदलने की जो सनक है, यह समझ में नहीं आती है। कोई विधेयक किसी की निजी महत्वकांक्षा, सनक और पूर्वाग्रहों के आधार पेश नहीं होना चाहिए।
दरअसल, शिवराज के बिल पेश करते ही विपक्ष ने नियम 72(1) के तहत बिल के पुर:स्थापित करने पर आपत्ति दर्ज करा दी। इस दौरान विपक्ष के कुछ सांसदों ने अपनी बात रखी, जिसका जवाब मंत्री शिवराज चौहान ने दिया।
विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए शिवराज चौहान ने कहा कि हमने यूपीए से 4 गुना ज्यादा पैसा देकर मनरेगा को मजबूत किया है। इनको तकलीफ मजदूरी के दिन 100 से बढ़ाकर 125 दिन की गारंटी देने से हैं। इसमें 1 लाख 51 हजार करोड़ से ज्यादा की राशि का प्रावधान किया गया। इस बिल से हम गरीब का सम्मान और महात्मा गांधी का सपना पूरा कर रहे हैं। ये बिल गांधी जी की भावनाओं के अनुरूप राम राज्य की स्थापना के अनुरूप है।
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने कहा कि मनरेगा 20 साल से ग्रामीण भारत को रोजगार देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में सक्षम रहा है। मनरेगा के तहत केंद्र मांग पर आधारित राशि देता है। जबकि इस बिल में केंद्र को राशि पहले से निर्धारित करने का प्रावधान किया है। ग्राम सभाओं के अधिकार कमजोर किया गया है। रोजगार का कानूनी अधिकार कमजोर हो रहा है। मनरेगा में 90 फीसदी से घटाकर 60 फीसदी कर प्रदेशों की अर्थव्यवस्था पर भार डाला जाएगा। मजदूरी की बढ़ोतरी की बात नहीं की गई है।
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने बिल का विरोध किया। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी का रामराज्य का विजन कभी भी राजनीतिक प्रोग्राम नहीं था। यह गांवों के सशक्तिकरण पर आधारित सामाजिक-आर्थिक रूपरेखा थी और ग्राम स्वराज्य में उनका अटूट विश्वास उनके रामराज्य के विजन का अभिन्न अंग था। महात्मा गांधी का नाम हटाने से बिल अपनी नैतिक दिशा और ऐतिहासिक वैधता खो देगा। थरूर ने तंज करते हुए कहा, देखो ओ दीवानों तुम ये काम ना करो, राम का नाम बदनाम ना करो।
Published on:
17 Dec 2025 03:42 am
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