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वेदांता को वापस मिला जाम्बिया की कोंकोला कॉपर माइंस का स्वामित्व

- केसीएम में है 16 मिलियन टन तांबे का भंडार

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वेदांता को वापस मिला जाम्बिया की कोंकोला कॉपर माइंस का स्वामित्व

वेदांता को वापस मिला जाम्बिया की कोंकोला कॉपर माइंस का स्वामित्व

नई दिल्ली। पिछले चार साल से कानूनी दांव पेच में फंसी जाम्बिया की कोंकोला कॉपर माइंस (केसीएम) का स्वामित्व एक बार फिर भारतीय कम्पनी वेदांता रिसोर्सेज लिमिटेड को मिल गया है। वेदांता ने बुधवार को जाम्बिया के खान और खनिज विकास मंत्री पॉल काबुस्वे के बयान के हवाले से यह दावा किया।

केसीएम की विश्व स्तरीय खदानों में 16 मिलियन टन तांबे का भंडार और संसाधन हैं। इसका 2.3 प्रतिशत कॉपर ग्रेड वैश्विक औसत 0.4 प्रतिशत से काफी अनुकूल है। कम्पनी ने कहा कि देश में तांबे की मांग ऊर्जा ट्रांजिशन प्रौद्योगिकियों के लिए एक महत्वपूर्ण खनिज के रूप में हर साल लगभग 25 प्रतिशत बढ़ रही है। ऐसे में भारत के लिए केसीएम में 79.4 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ बहुमत शेयरधारक के रूप में वेदांता की बहाली तांबे से समृद्ध जाम्बिया में भारतीय स्वामित्व वाली संपत्ति सुरक्षित सप्लाई चेन के रूप में महत्वपूर्ण है।

केसीएम में डीप अंडरग्राउंड माइनिंग के लिए इस्तेमाल की जाने वाली टेक्नोलॉजी को भारत में बड़े पैमाने पर कॉपर माइनिंग के लिए काम लिया जा सकता है। अभी भारत कॉपर कंसंट्रेशन के लिए 90 फीसदी से ज्यादा और फिनिश्ड कॉपर के लिए 40 प्रतिशत से ज्यादा आयात पर निर्भर है। वेदांता अब केसीएम के विश्व स्तरीय अपस्ट्रीम उत्पादन को भारत में डाउनस्ट्रीम ऑपरेशन के साथ जोड़कर पूर्ण इंटीग्रेटेड तरीके से देश की जरूरतों को पूरा कर सकेगी।

वेदांता रिसोर्सेज के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने केसीएम में वेदांता का स्वामित्व बहाल करने पर जाम्बिया सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि कम्पनी साल 2004 से केसीएम के लिए प्रतिबद्ध है। यह कम्पनी के पोर्टफोलियो में एक बेशकीमती सम्पत्ति है। तांबा भविष्य की प्रौद्योगिकियों के लिए एक महत्वपूर्ण खनिज है। वेदांता तांबे का फुल इंटीग्रेटेड उत्पादक बन जाएगा और भारत की तेजी से बढ़ती मांग को पूरा करने के साथ जाम्बिया को दुनिया में तांबे का अग्रणी उत्पादक बनाएगी।

उल्लेखनीय है कि पूर्व राष्ट्रपति एडगर लुंगु के नेतृत्व वाली जाम्बिया सरकार ने साल 2019 में कोंकोला कॉपर माइंस को अंतिम परिसमापन में डाल दिया था। इसके बाद से कानूनी विवाद चल रहा था। जाम्बिया में अगस्त 2021 में सत्ता परिवर्तन के बाद राष्ट्रपति हाकैंडे हिचिलेमा की सरकार ने विवाद के समाधान की कोशिशें तेज की। वेदांता के साथ समझौते के बाद खान मंत्री काबुस्वे ने कहा कि वेदांता बहुसंख्यक शेयरधारक के रूप में केसीएम के संचालन और इसे पुनर्जीवित करने के लिए वापस आएगी।