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हम यहां ड्यूटी निभाने के लिए हैं, किसी को खुश करने के लिए नहीं : CJI डीवाई चंद्रचूड़

CJI DY Chandrachud Comment: सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश ने डी वाई चंद्रचूड़ ने सोमवार को एक याचिका पर सुनवाई करते हुए बड़ी टिप्पणी की। उन्होंने सुनवाई के दौरान कहा कि हम यहां संवैधानिक ड्यूटी निभाने के लिए हैं, किसी को खुश करने के लिए नहीं।  

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We are Here To Do A Constitutional Duty, Not To Please Anyone Says CJI DY Chandrachud

CJI DY Chandrachud Comment: सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश डी वाई चंद्रचूड़ अपने बेबाक राय और टिप्पणियों को लेकर अक्सर सुर्खियों में रहते हैं। आज एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान उन्होंने फिर ऐसी टिप्पणी की कि उनके बयान की चर्चा शुरू हो गई है। सीजेआई ने एक पीएलआई के सुनवाई के दौरान कहा कि हम यहां अपनी ड्यूटी निभाने के लिए हैं, किसी को खुश करने के लिए नहीं। सीजेआई ने यह टिप्पणी महिला-पुरुष की शादी के उम्र को लेकर दायर की गई एक याचिका पर की। दरअसल अधिवक्ता अश्विन उपाध्याय ने सु्प्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की है। इस जनहित याचिका में उन्होंने मांग की है कि महिला-पुरुष की शादी की उम्र सीमा एक होनी चाहिए। सोमवार को इसी याचिका पर सुनवाई के दौरान सीजेआई ने यह टिप्पणी की।


याचिकाकर्ता की दलील से नाराज हुए CJI-

सुनवाई के दौरान सीजेआई याचिकाकर्ता अश्विन उपाध्याय की एक दलील ने नाराज हो गए। जिसके बाद उन्होंने कहा कि इसे सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरित करने का क्या मतलब था। फिर सीजेआई ने अश्विन उपाध्याय पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि हम यहां आपकी राय सुनने के लिए नहीं है। सौभाग्य से हमारी वैधता इस बात पर निर्भर नहीं करती है कि आप हमारे बारे में क्या महसूस करते हैं। हम आपके बारे में जो महसूस करते हैं, उस पर आपकी अनावश्यक टिप्पणी नहीं चाहते।

आपको या किसी राजनीति को खुश करने नहीं आए हैंः CJI

अपने इसी बयान में सीजेआई ने आगे कहा कि हम यहां अपना संवैधानिक कर्तव्य निभाने के लिए आए हैं। आपको खुश करने के लिए नहीं। न ही हम यहां किसी राजनीति को खुश करने के लिए हैं। सीजेआई ने याचिकाकर्ता को वकालत धर्म का पाठ भी बठाया। कहा आप बार काउंसिल के सदस्य हैं, हमारे सामने बहस करें।


सीजेआई बोले- यह संसद का मामला, अनुच्छेद 32 का मजाक नहीं बनाए-


मामले की सुनवाई के अंत में सीजेआई ने कहा कि यह संसद का मामला है। संसद भी संविधान का संरक्षक है। इसलिए अनुच्छेद 32 का मजाक नहीं बनाओ। कुछ मामले संसद के लिए आरक्षित है। सीजेआई ने यह भी कहा कि हम यहां कानून नहीं बना सकते। कानून बनाने का अधिकार संसद के पास है। सीजेआई की इस टिप्पणी के दौरान कोर्ट रूम में थोड़ी देर के लिए माहौल गरमा गया। थोड़ी देर बाद सब कुछ सामान्य हुआ।

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